कानपुर देहात। अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व दशहरा बुधवार को जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। शहर से ग्रामीण अंचल तक आयोजित रामलीला में रावण वध के बाद पुतला दहन किया गया। इस दौरान लोग जय श्रीराम का उद्घोष करते रहे। वहीं, बारिश से दशहरा मेले में कुछ खलल भी पड़ा। इसके बाद भी रावण दहन के समय काफी भीड़ उमड़ी।
शहर के अकबरपुर स्थित लंकापुरी मैदान में दशहरा का मुख्य मेला लगा। यहां राम-रावण के युद्ध का मंचन किया गया। अंत में अन्याय और अत्याचार के प्रतीक रावण का अंत भगवान राम ने किया, तो जयश्री राम के जयकारों से मैदान गूंज उठा।
यहां 60 फीट ऊंचा पुतला बारिश से भीग गया था, उसे जलाने के लिए पट्रोल का इस्तेमाल किया गया। कार्यक्रम के दौरान डीएम नेहा जैन, एसपी सुनीति, एमएलसी अविनाश सिंह के अलावा रामलीला समिति के कृष्ण कुमार मिश्रा, अखिलेश श्रीवास्तव, श्यामू गुप्ता, नगर पंतायत अध्यक्ष ज्योत्सना कटियार मौजूद रहीं। मेले में लोगों ने जमकर खरीद की।
कम पहुंचे लोग, मायूस रहे दुकानदार
सरवनखेड़ा। गजनेर की रामलीला मैदान में बनाया गया 35 फीट ऊंचा रावण का पुतला बारिश से भीग गया। उसे जलाने के लिए पेट्रोल डाला गया। वहीं, कमेटी के लोगों की काफी मशक्कत के बाद पुतला जला तो मैदान तालियों से गूंज उठा। कमेटी के उपाध्यक्ष पुतु सिंह ने बताया कि भीगने की वजह से पेट्रोल डालकर पुतला दहन किया गया। मेले में जसवापुर, जोधेपुर, कौसम, दिलावलपुर, हरचंदपुर, रघुनाथपुर, भदेसा समेत 25 गांवों के लोग पहुंचते थे। इस बार बारिश की वजह से भीड़ नहीं जुटी, इससे मेले में दुकानदार मायूस रहे। (संवाद)
सैंथा गांव में नहीं हुई लीला, न लगा मेला
सरवनखेड़ा। सैंथा गांव में जूनियर स्कूल के पास विजयादशमी पर दोपहर दो बजे के बाद लक्ष्मण मूर्छा, राम-रावण का युद्ध की लीलाओं का मंचन किया जाता था। यहां मेला भी लगता था। इस वर्ष भी कलाकारों ने अभिनय के लिए कई दिनों तक तैयारी की थी। कार्यक्रम के लिए टेंट व साउंड की व्यवस्था भी कर ली गई, लेकिन बारिश ने सब कुछ बिगाड़ दिया। कमेटी के अध्यक्ष ब्रज किशोर मिश्रा ने बताया कि बारिश की वजह से न तो रामलीला हुई और न ही मेला लगा। (संवाद)