कानपुर देहात। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज दो में जिले की 195 ग्राम पंचायतों में 3.72 करोड़ रुपये का गबन हुआ था। इसमें 44 ग्राम पंचायतों में गबन की राशि वापस होने पर बैंक खातों के संचालन पर लगी रोक हटा ली गई है। वापस हुई धनराशि 72.73 लाख रुपये है। करीब दो माह बाद इन गांवों में फिर से विकास कार्य रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।
स्वच्छ भारत मिशन फेज दो में ठोस व तरल कचरा निस्तारण सोक पिट बनाने के लिए 347 ग्राम पंचायतों में 602.63 लाख रुपये की लिमिट तय की गई थी। इधर जिम्मेदारों ने 195 ग्राम पंचायतों में बिना काम कराए ही डोंगल के जरिये 3.72 लाख रुपये का गबन कर लिया।
शासन के हस्तक्षेप पर कार्रवाई शुरू हुई। सीडीओ ने नामजद एफआईआर के आदेश दिए थे, लेकिन तत्कालीन डीपीआरओ ने अज्ञात में केस दर्ज कराया था। शासन के संज्ञान लेने पर दो डीपीआरओ समेत तीन अधिकारी निलंबित कर दिए गए।
संविदा कर्मियों को हटा दिया गया। पूर्व में दर्ज एफआईआर में एक कंसल्टेंट की गिरफ्तारी हो चुकी है। जबकि 14 खंड प्रेरकों पर अभी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। ब्लॉकों में कार्यरत खंड प्रेरकों के भेजे गए जवाब का परीक्षण किया जा रहा है।
इधर गबन की धनराशि वापसी के लिए प्रशासनिक स्तर से प्रयास शुरू किए गए थे। अब तक छह ब्लॉकों के 44 ग्राम पंचायतों में गबन धनराशि राज्य स्तरीय नोडल एकाउंट में वापस की गई है। डीपीआरओ आईएन सिंह ने इसकी सूचना शासन को भेजी। इसके आधार पर शासन स्तर से उक्त ग्राम पंचायतों के धनराशि आहरण और वितरण पर लगाई गई रोक हटा ली गई है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत दस ब्लॉकों के 195 गांवों में गबन की धनराशि को नोडल एकाउंट में वापस करने क प्रक्रिया शुरू की गई। बिना काम के जिन फर्मों को भुगतान हुआ उनसे धनराशि वापस कराई गई। अब तक 44 ग्राम पंचायतों में शत प्रतिशत धनराशि वापस करा ली गई है। इन ग्राम पंचायतों के खाता संचालन पर लगी रोक हटा दी गई है। - आईएन सिंह, डीपीआरओ