इसके बाद अदालत में मामले की नियमित सुनवाई शुरू होने पर अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष ने भी चार गवाहों को अदालत में पेश कर उनकी गवाही दर्ज कराई थी। मामले में पिछली तिथि पर दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई थी।
गुरुवार को अदालत ने अनुज को दोषी करार देते हुए 20 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास काटने का आदेश दिया है। अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं।
पीड़िता के बयान बने सजा का आधार
विशेष लोक अभियोजक राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मामले में अभियोजन की ओर से सात गवाहों को अदालत में पेश किया गया था। इनमें मुख्य गवाह स्वयं पीड़िता थी। पीड़िता ने अपने बयानों से कोर्ट में दुष्कर्म की घटना को साबित किया था। घटना की पुष्टि होने पर कोर्ट ने दोषी को सजा सुनाई है।
जिले का पहला मामला, सबसे कम समय में मिली अपराधी को सजा
शासन ने अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाने के लिए पिछले महीने ऑपरेशन कन्विक्शन की शुरूआत करते हुए अभियोजन पक्ष को मामले चिह्नित कर 30 दिनों में विचारण पूरा कर अपराधी को सजा दिलाए जाने के संबंध में आदेश जारी किए गए थे। विशेष लोक अभियोजक राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मामले में पुलिस ने घटना की एफआईआर 13 जुलाई को दर्ज करने के चौबीस घंटे के अंदर 14 जुलाई को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
17 जुलाई को मामले की विवेचना पूरी कर आरोपपत्र कोर्ट में पेश कर दिए थे। मामले में 19 जुलाई को आरोपी पर कोर्ट ने आरोप तय किए थे इसके बाद पुलिस के सहयोग से सभी गवाहों को नियमित अदालत में पेश किया गया। इससे 29 दिनों में विचारण पूरा होने पर दोषी को सजा दिलाने में अभियोजन को कामयाबी मिली है। यह जनपद का पहला मामला है, जिसमें कम समय में अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाया गया।
एसपी का पर्यवेक्षण, सिपाही की पैरवी रही जबरदस्त
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पुलिस अफसरों ने आरोपी को जल्द से जल्द सजा दिलाने का फैसला कर लिया था। यही वजह रही कि रूरा थानाप्रभारी समर बहादुर सिंह ने केस रजिस्टर्ड करने के 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फिर तीन दिन में विवेचना पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति का पर्यवेक्षण और सिपाही योगेंद्र की पैरवी भी अदालत में जबरदस्त रही। इसी का नतीजा रहा कि एक महीने के अंदर आरोपी को अदालत ने दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी।