सियासी मंचों से हवा-हवाई और लुभावनी बातें करने वाले नेताओं को इस बार नगर निकाय चुनाव में जनता ने करारा सबक सिखाया है। दावे के उलट कोई भी पार्टी जिले में अपनी उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं हासिल कर सकी है। हर सीट पर लोगों ने अपने मुद्दों के आधार पर स्थानीय चेहरों को अपना नेता चुना है। हांकने वाले नेताओं को आईना दिखाने वाले इस चुनावी नतीजों के बाद हर पार्टी में अंदरखाने विरोध की आवाज तेज हो रही है।
कन्नौज जिले में नगर निकायों की आठ सीट हैं। इसमें कन्नौज, छिबरामऊ और गुरसहायगंज नगर पालिका परिषद हैं जबकि समधन, तिर्वा, सौरिख, तालग्राम और सिकंदरपुर नगर पंचायत हैं। सभी पार्टी ने चुनाव के दौरान सभी सीट पर जीत का दावा किया था। भाजपा ने केंद्र व प्रदेश की डबल इंजन सरकार का हवाला देते हुए निकायों में ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने का दावा किया था। हालांकि दावे के उलट पार्टी को सिर्फ तीन सीट छिबरमऊ, गुरसहायंज और तिर्वा में ही कामयाबी मिली। कभी सपा के गढ़ रहे इस जिले में इस बार साइकिल भी रफ्तार नहीं पकड़ सकी। उसे सिर्फ तालग्राम में ही कामयाबी मिली। इससे सपा के खेमे में गहमा-गहमी है। पिछली बार दो सीट जीतने वाली बसपा को इस बार सिर्फ सदर नगर पालिका पर ही कामयाबी मिली। चार सीट पर उसे दूसरा नंबर मिला। कांग्रेस को एक सीट समधन में कामयाबी मिली है। बाकी की सीट पर उसकी जमानत जब्त हो गई। सिकंदरपुर में निर्दलीय को जीत मिली। सौरिख में भाजपा का बागी जीत गया।
सदर पालिका की हार से भाजपा खेमे में सन्नाटा
कन्नौज नगर पालिका को जीतने के लिए भाजपा ने खूब जोर लगाया था पर कामयाबी नहीं मिल सकी। बसपा उम्मीदवार की रणनीति के आगे भाजपा के नेताओं की हर चाल बेकार साबित हुई। वर्ष 2017 में प्रदेश की सत्ता संभालने वाली भाजपा को उस साल भी निकाय चुनाव में इस सीट पर करारी हार मिली थी। पिछले साल प्रदेश में जब भाजपा दोबारा सत्ता में आई तो फिर से कन्नौज नगर पालिका को जीतने का खाका बनाया गया। लेकिन इस बार भी नाकामी ही हाथ लगी। लगातार दो बार मिली हार से भाजपा के खेमे में सन्नाटा पसरा है। अंदरखाने कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी है। यह संयोग है कि 2012 में सपा के शासनकाल में हुए चुनाव के दौरान कन्नौज सीट को भाजपा ने जीत लिया था। लेकिन अब उसे कामयाबी नहीं मिल रही है।
गढ़ में हार से सपा में अंदरखाने विरोध
कभी सपा का गढ़ रहे कन्नौज में इस बार भी नगर पालिका चुनाव मायूसी ही लेकर आया। पिछले नगर पालिका में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। इस बार तालग्राम नगर पंचायत में ही जीत मिल सकी है। यह हालत तब है जब यहां सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लगातार दो दिन तक आए थे। जिले की सभी सीटों पर कार्यक्रम किया था। उनकी पत्नी व सांसद डिंपल यादव ने भी सौरिख और छिबरामऊ में सभा की थी। फिर भी पार्टी को निराशा ही मिली। कन्नौज सदर सीट पर जिलाध्यक्ष की पत्नी जमानत भी नहीं बचा सकीं। इस नतीजा से अखिलेश यादव को नाराज बताया जा रहा है। इसी के तहत वह यहां 22 मई को पार्टी कार्यालय पर आएंगे। कार्यकर्ताओं संग समीक्षा होगी। चर्चा है कि अखिलेश यादव उस दिन सख्त फैसला भी ले सकते हैं।
भाजपा के सांसद-विधायकों का मांगा गया रिपोर्ट कार्ड
भाजपा में भी अंदरखाने सबकुछ बेहतर नहीं है। नतीजों से उभरी नाराजगी राजधानी तक पहुंची है। संगठन से सांसद व विधायकों की रिपोर्ट मांगी गई है। किस स्तर से मेहनत की गई, कहां चूक हुई। किस तरह पर लापरवाही हुई। कम सीट मिलने की अहम वजह क्या रही, इन सभी बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है।