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Kannauj: बाजार भाव से मात खाई सरकार, बंद हुई गेहूं खरीद, पढ़ें खास खबर

Sat, 17 Jun 2023 06:58 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
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गल्ला मंडी के गेहूं क्रय केंद्र पर पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला
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बाजार भाव के आगे गेहूं की सरकारी खरीद धड़ाम हो गई। किसानों को सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पसंद आया न ही गांव तक पहुंचकर फसल खरीदने की योजना पर ही भरोसा किया। बाजार में उससे ज्यादा भाव मिलने पर किसानों ने सरकारी केंद्रों से दूरी बनाए रखी। सरकार की ओर से जिले में 2.90 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया, लेकिन पहली अप्रैल से 15 जून के बीच सरकारी सेंटर पर बमुश्किल 2999 क्विंटल गेहूं की ही खरीद हो सकी है। आंकड़ों में यह कुल लक्ष्य का करीब एक प्रतिशत ही है।

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सरकार की ओर से जिले में गेहूं की खरीद के लिए तीन एजेंसियों की मदद से 35 सेंटर शुरू किए। पहली से शुरू हुई सरकारी खरीद के तहत पहले ही दिन से सेंटरों पर सन्नाटा दिखना शुरू हो गया था। इक्का-दुक्का सेंटर की बात छोड़ दें तो अमूमन सभी सेंटर पर कमोबेश हर रोज सन्नाटा ही पसरा रहा। हालांकि सरकार ने पिछले साल के 2015 रुपये क्विंटल के मुकाबले इस बार 2125 रुपये क्विंटल कीमत तय की थी।

इसके बावजूद किसानों का रुख सरकारी सेंटर पर नहीं हुआ। शुरू से ही बाजार का भाव सरकारी सेंटर से ज्यादा रहा। बाजार में ज्यादा कीमत मिलने पर किसानों ने अपनी उपज आढ़तों पर ही बेचना बेहतर समझा। न सिर्फ उन्हें सरकारी कीमत से 100 से 150 रुपये क्विंटल तक ज्यादा कीमत मिली, बल्कि अपने पैसों के लिए भटकना भी नहीं पड़ा।

घर से गेहूं खरीदने का वादा भी बेअसर
सरकारी सेंटर पर लगातार सन्नाटे की खबर के बीच सरकार की ओर से किसानों से उनकी उपज उनके घर से ही खरीदने की योजना भी शुरू की गई थी। मकसद था कि सेंटर तक आने में किसानों का ढुलाई का खर्च बचे। शर्त थी कि कम से कम 100 क्विंटल गेहूं होगा तो टीम पहुंचेगी। फिर भी किसानों का मन नहीं बदला।

तीन एजेंसी की मदद से इस तरह हुई खरीद
- खाद्य विभाग के छह सेंटर पर 146.50 टन
- भारतीय खाद निगम के तीन सेंटर पर 01.85 टन
- पीसीएफ ने अलग-अलग 26 सेटर पर 150.59 टन

इस सेंटर पर तो 75 दिन में बोहनी तक नहीं
जिले में 35 सेंटर शुरू किए गए थे। उसके तहत एफसीआई को तीन सेंटर की जिम्मेदारी मिली थी। एफसीआई के फतेहपुर-जसोदा स्थित केंद्र पर गेहूं की खरीद शून्य रही है। यहां पहली अप्रैल से 15 जून तक की सरकारी खरीद प्रक्रिया में गेहूं खरीद की बोहनी तक नहीं हो सकी।

लक्ष्य का सिर्फ एक फीसदी...लेकिन पिछले साल से दोगुना
यह भी दिलचस्प आंकड़ा है कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले गेहूं की सरकारी खरीद बमुश्किल एक फीसदी ही हो सकी है, लेकिन यह भी दिलचस्प है कि पिछले साल के मुकाबले यह करीब-करीब दोगुना है। पिछले साल भी इसी साल की तरह 2.90 लाख क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य था, लेकिन खरीद सिर्फ 1231 कुंतल की हो सकी थी।

जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया, उसमें से आधे भी नहीं पहुंचे सेंटर
गेहूं को सरकारी सेंटर पर बेचने के लिए पहले विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। उसी रजिस्ट्रेशन के आधार पर किसानों के उपज की खरीद होती है। इस बार सिर्फ 196 किसानों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया था, उसमें से भी सिर्फ 86 किसानों ने ही अपनी उपज पेजी। जिला खाद्य विपणन अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक जिन किसानों ने उपज बेची थी, उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित कीमत के तहत ही भुगतान किया जा चुका है। 86 किसानों के खाते में 63.46 लाख रुपये भेजे जा चुके हैं। किसी का कोई बकाया नहीं है।
 
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सरकार ने इस बार 2125 रुपये समर्थन मूल्य घोषित किया था। बाजार में गेहूं की खरीद 2200 रुपये से लेेकर 2250 तक हुई। इससे किसानों ने अपनी उपज आढ़तों पर ही बेची। इससे जिले में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले करीब एक फीसदी ही गेहूं की खरीद हो सकी है।- अनूप श्रीवास्तव, जिला खाद्य विपनण अधिकारी

पिछले तीन साल की खरीद का आंकड़ा
- वर्ष 2021-22 में 6886 किसानों से 2.78 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद हुई।
- वर्ष 2022-23 में सिर्फ 43 किसानों से 1231 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई।
- वर्ष 2023-24 में सिर्फ 86 किसानों से 2999 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई।
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