अभियोजन का तर्क
अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दामोदर मिश्रा, डीजीसी दिलीप अवस्थी, एडीजीसी धर्मेंद्र पाल सिंह ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि ज्योति की नृशंस हत्या की गई है, जिससे पूरा समाज द्रवित है। मामले में ऐसी सजा दी जाए जिससे समाज में संदेश जाए।
पति द्वारा पत्नी की लोमहर्षक हत्या कराई गई, जिससे पूरा समाज आक्रोशित है। अभियुक्तों को मृत्युदंड दिया जाए। इस संबंध में अभियोजन ने मुकेश बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश, कुंजुकुंजु जर्नाद्धनन बनाम स्टेट ऑफ केरला व मच्छी सिंह व अन्य बनाम स्टेट ऑफ पंजाब की विधि व्यवस्थाओं का भी जिक्र किया।
बचाव पक्ष का तर्क
बचाव पक्ष की ओर से पीयूष के अधिवक्ता सईद नकवी, मनीषा के अधिवक्ता कमलेश पाठक, अवधेश व सोनू के अधिवक्ता सुरेश सिंह चौहान, रेनू के अधिवक्ता रामबहल विद्यार्थी ने कोर्ट में तर्क रखे। अधिवक्ताओं का कहना था कि सभी अभियुक्त नवयुवक हैं, पहला अपराध है।
चार अभियुक्त तो इतने गरीब हैं कि वह अधिकतम जुर्माना होने पर हाईकोर्ट से रहम मिलने के बावजूद जुर्माना अदा न कर पाने की हालत में जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। इनकी गरीबी पर गौर करते हुए कम से कम जुर्माना लगाया जाए। पीयूष संभ्रांत परिवार का नवयुवक है, मनीषा अविवाहित नवयुवती है, दोनों का यह प्रथम अपराध है। इससे पहले न तो किसी अपराध में दोष सिद्ध हुआ, न ही उसका कोई आपराधिक इतिहास। कम से कम सजा दें।