गोली मारी...फिर धारदार हथियार से मारा
तहरीर में उन्होंने अपने पिता की गोली व धारदार हथियारों से हत्या किए जाने की बात कही थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। लगभग एक साल बाद 15 अप्रैल 1983 को तत्कालीन जिला जज ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सड़क हादसे में हो गई थी मौत
इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील करते हुए जमानत करा ली थी। तबसे मुकदमा विचाराधीन चल रहा था। इसी बीच 2018 में वादी अशोक कुमार शुक्ल की एक दुर्घटना में मौत हो गई। वह अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने की हसरत लिए ही दुनिया से चले गए।
दस दिन के अंदर अदालत में समर्पण का आदेश
मृतक के पौत्र अरविंद शुक्ल ने मुकदमे की पैरवी जारी रखी। 30 मई 2023 को हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया। न्यायाधीश अताउर्रहमान मसूदी व सरोज यादव की पीठ ने राजकिशोर और करुणा शंकर की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है और दस दिन के अंदर अदालत में समर्पण का आदेश जारी किया।