भगवान बुद्घ की तपस्थली फर्रुखाबाद में इस समय विश्वभर के बौद्ध धर्म गुरुओं का मेला लगा हुआ है। यह खास मौका है अंतर्राष्ट्रीय अविधम्मा का तृतीय कार्यक्रम का। तीन दिन तक बौद्घ धर्मगुरु यहां रहकर नमन करेंगे। यूथ बुधिष्ठ सोसाइटी राजघाट के तत्वावधान में रविवार से शुरू हुए इस कार्यक्रम के प्रमुख सुरेशचंद्र बौद्घ ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय अविधम्मा में पाली सूत्रों का पाठ होता है। इसमें काफी संख्या में देश-विदेश के भिक्षुगण भाग लेते हैं। स्तूप को फूलों से सजाया गया है। स्तूप सजाने के लिए दिल्ली से डिजाइनर बुलाए गए हैं।
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संकिसा के बाद कुशीनगर और बोधगया में संपन्न होगा यह कार्यक्रम
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फूलों से सजाया गया स्तूप
- फोटो : अमर उजाला
अमेरिका से आईं लाइट आफ बुद्घ धर्म फाउंडेशन की निदेशक बांगमोडिस्की ने बताया कि यह कार्यक्रम दिल्ली में संपन्न हो चुका है। अब संकिसा के बाद कुशीनगर और बोधगया में संपन्न होगा। विदेशी भिक्षु संघ के ओम जमुना म्यांमार, डा. जुरान, थाईलैंड की मिस मोलिनी म्यांमार, डा. धम्मपाल थैरो, भंते नागसेन, संघकीर्ति, आनंदमित्र समेत लगभग एक सैकड़ा भिक्षुगणों ने यहां तीन दिन के लिए डेरा डाल दिया है।
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यह वही स्थान है, जहां तथागत ने काफी समय तक साधना की थी
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स्तूप के पास बौद्घ ग्रंथों का पाठ कर रहे विदेशों से आए भिक्षु
- फोटो : अमर उजाला
बौद्घ भिक्षुओं ने स्तूप को बुद्घ बिहार से लेकर स्तूप तक परिक्रमा की और यहां की माटी को माथे से लगाकर कहा कि यह वही स्थान है, जहां तथागत ने काफी समय तक साधना की थी। उनकी साधना करने से यह स्थान भी अद्भुत शांति को उत्पन्न हो गया है। बौद्घ भिक्षुओं ने कहा कि इस वजह से बौद्घ अनुयायियों के लिए यह स्थल तीर्थ बन गया है। अमेरिका से आईं बांगमोडिस्की ने कहा कि तथागत जिस स्थान पर बैठते थे। उस स्थान के आसपास शांति उत्पन्न हो जाती थी।
तथागत ने राग में जीने की कला सिखाई
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भगवान बुद्घ की तपस्थली पर बौद्ध धर्म गुरुओं का मेला
- फोटो : अमर उजाला
तथागत ने हमेशा अपने अनुयायियों को राग-विराग से अलग हटकर बीत राग में जीने की कला सिखाई है। उनका मानना था कि जीवन एक वीणा की तरह है। यदि वीणा के तार ढीले छोड़ दिए जाते तो उनमें संगीत पैदा नहीं होता और यदि उन्हें ज्यादा कस दिया जाता है तो वह टूट जाते हैं। जीवन में संगीत पैदा करने के लिए उनमें बीच की स्थिति तलानी जरूरी है। ताकि कुशल वीणा वादक की उंगलियां उससे संगीत पैदा कर सकें। यह उपदेश तथागत ने अपने प्रिय शिष्य आनंद को दिया।
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जीवन में संगीत पैदा करने के लिए बीच की स्थिति लानी जरूरी
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विदेश से आए अतिथियों का इस अंदाज में हुआ स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
आनंद जब साधना के दौरान नंगे पैर कांटों पर चलने लगा तो उन्होंने कहा कि तुम वीणा के तार ज्यादा कस रहे हो। यह जीवन रूपी वीणा नष्ट हो जाएगा। इसमें संगीत पैदा करने के लिए बीच की स्थिति लानी जरूरी है।
परिक्रमा कर रहे बौद्ध भिक्षु इसीतारा
- फोटो : अमर उजाला
लाइट बुद्ध धर्म फाउंडेशन अमेरिका की निदेशक वांगमोडिस्की के साथ आए नन्हे बौद्ध भिक्षु इसीतारा ने भी परिक्रमा की। संकिसा की माटी को अपने माथे से लगाया। यह बौद्ध भिक्षु चर्चा का विषय बने रहे।