कानपुर। यूएवी के तकनीकी सपोर्ट के लिए सेना को दूसरे विशेषज्ञों पर निर्भर न रहना पड़े इसके लिए आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक जवानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को यूएवी और ड्रोन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए संस्थान के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञों की टीम जुटी है। इसके लिए संस्थान और सेना के बीच समझौता हुआ है। इसमें जवानों को मुख्य रूप से आरसी फैब्रिकेशन, एयरोडायनामिक्स, फ्लाइंग ऑपरेशंस से जुड़ी बारीकियों को सिखाया जा रहा है। आईआईटी के 30 से अधिक ड्रोन का इस्तेमाल सेना के अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा रहा है। संस्थान की एसएनटी काउंसिल के तहत एयरोमॉडलिंग क्लब की ओर से विशेष कार्यशाला आयोजित की गई है। इसमें सशस्त्र बल के जवानों ने हिस्सा लिया है। विशेषज्ञों की टीम ड्रोन व यूएवी की बारीकियों के साथ उसे उड़ाने, कंट्रोल करने संबंधी जानकारी दे रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रशिक्षण शेड्यूल सेना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे कई चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिससे धीरे-धीरे तकनीक से जुड़े सभी जवानों को ड्रोन व यूएवी को कंट्रोल करना सिखाया जा सके। (ब्यूरो)