होलिका दहन के नियम व पूजा विधि
ज्योतिषाचार्य व हस्तरेखा विशेषज्ञ पं. पीएन द्विवेदी के अनुसार होलिका पूजन करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर की ओर करके बैठे। पूजन की थाली में रोली, पुष्प, माला, नारियल, कच्चा सूत, साबूत हल्दी, मूंग, गुलाल व पांच तरह के अनाज, गेंहू की बालियां, एक लोटा जल होना चाहिए।
ओम होलिकाये नम: मंत्र का करें जाप
होलिका के चारों ओर सात बार परिक्रमा करके कच्चा सूत लपेटना शुभ होता है। इसके बाद विधिवत तरीके से पूजन के बाद होलिका को जल का अर्घ्य दे। साथ ही (ओम होलिकाये नम:) मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इससे सारे कष्टों का नाश होता है। इससे घर परिवार में समृद्धि आती है।
स्वस्थ्य व खुशहाल जीवन मिलता है
ज्योतिष विशेषज्ञ अनुभव त्रिवेदी ने बताया कि होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में ही जाए तो सबसे शुभ होता है। होलिका की अग्नि में फसल सेंककर अगले दिन उसे ग्रहण करने से जीवन में निराशा और दुख का साया नहीं आता है। साथ ही वह व्यक्ति रोगों से मुक्त होकर स्वस्थ्य व खुशहाल जीवन जीता है।
ज्योतिषाचार्य पं. गौरव तिवारी ने बताया कि रंग की होली 8 मार्च को खेली जाएगी। क्योंकि, 7 मार्च को पूर्णिमा शाम 6 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। साथ ही 9 मार्च को द्वितीया भईया दूज का त्योहार भी मनाया जाएगा।
ये है होलिका दहन का मुहूर्त
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 7 मार्च को शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।