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बिकरू कांड के चार साल: जिस जमीन के लिए हुआ…वह आज भी विवादित, सुनील नहीं पेश कर पा रहे हैं संबंधित दस्तावेज

Wed, 03 Jul 2024 04:55 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: राहुल ने बताया कि बिकरू कांड से कुछ दिन पहले विकास दुबे ने जमीन का समझौता कराने के बहाने अपने यहां बुलाया। यहां उसे बंधक बनाकर पीटा गया। विकास दुबे ने मुंह में राइफल डालकर जमीन छोड़ने की धमकी दी थी। इसके बाद उसने चौबेपुर थाने पहुंचकर विकास दुबे के खिलाफ शिकायत की थी। इसी शिकायत के बाद पुलिस विकास दुबे को पकड़ने दो जुलाई की रात को बिकरू पहुंची थी।
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,बिकरू कांड की विवादित जमीन - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर के बिल्हौर में जिस जमीन के विवाद में दो जुलाई 2020 की रात को बिकरू कांड हुआ था, उस जमीन का आज तक पटाक्षेप नहीं हो सका। कब्जा तो जादेपुर निवासी राहुल तिवारी का है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में जमीन शिवम दुबे के बहनोई सुनील के नाम पर दर्ज है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है और पांच जुलाई को इस मसले पर सुनवाई भी होनी है।

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उधर, बिकरू कांड के बाद से जमीन सरकार के कब्जे में है। बता दें, शिवम विकास दुबे का रिश्ते में भतीजा लगता है।  दरअसल, जादेपुर निवासी राहुल तिवारी की शादी पड़ोस के गांव मोहनी निवादा निवासी लल्लन शुक्ला की बेटी से हुई थी। लल्लन की तीन बेटियों में एक की शादी अभी होनी है।

बेटा न होने की वजह से लल्लन का भांजा सुनील उनके साथ ही रहने लगा था।  सुनील की शादी विकास दुबे की भतीजी समीक्षा (शिवम की बहन) से हुई थी। लल्लन की मौत के बाद सुनील ने दावा किया कि मृत्यु से पहले मामा उसे साढ़े छह बीघा जमीन दान में दे गए थे।

करोड़ों की जमीन पर विकास दुबे की भी नीयत खराब हो गई
इसी आधार पर सुनील ने जमीन का बैनामा अपने नाम करवा लिया था। उधर, दामाद होने के नाते उक्त जमीन पर राहुल खेती करने लगा। राहुल ने बताया कि वह जमीन बेचकर साली की शादी करना चाहता था, लेकिन करोड़ों की इस जमीन पर विकास दुबे की भी नीयत खराब हो गई। वह सुनील के माध्यम से इस जमीन को कब्जाना चाहता था। इसके चलते कई बार उसे धमकाया भी गया।x

करोड़ों की जमीन पर विकास दुबे की भी नीयत खराब हो गई
इसी आधार पर सुनील ने जमीन का बैनामा अपने नाम करवा लिया था। उधर, दामाद होने के नाते उक्त जमीन पर राहुल खेती करने लगा। राहुल ने बताया कि वह जमीन बेचकर साली की शादी करना चाहता था, लेकिन करोड़ों की इस जमीन पर विकास दुबे की भी नीयत खराब हो गई। वह सुनील के माध्यम से इस जमीन को कब्जाना चाहता था। इसके चलते कई बार उसे धमकाया भी गया।

मुंह में राइफल डाल जमीन छोड़ने की दी थी धमकी
राहुल ने बताया कि बिकरू कांड से कुछ दिन पहले विकास दुबे ने जमीन का समझौता कराने के बहाने अपने यहां बुलाया। यहां उसे बंधक बनाकर पीटा गया। विकास दुबे ने मुंह में राइफल डालकर जमीन छोड़ने की धमकी दी थी। इसके बाद उसने चौबेपुर थाने पहुंचकर विकास दुबे के खिलाफ शिकायत की थी। इसी शिकायत के बाद पुलिस विकास दुबे को पकड़ने दो जुलाई की रात को बिकरू पहुंची थी।

पूरी तैयारी के साथ पुलिस पर कर दिया था हमला
इसकी खबर विकास को पहले ही लग गई और उसने पूरी तैयारी के साथ अपने साथियों के साथ पुलिस पर हमला कर दिया था। इसमें बिल्हौर के सीओ देवेंद्र दुबे, शिवराजपुर एसओ महेश कुमार यादव, एसआई मंधना अनूप कुमार सिंह, एसआई नेबू लाल, कांस्टेबल जितेंद्र पाल, सुल्तान सिंह, बबलू कुमार और राहुल कुमार शहीद हो गए थे।

कोर्ट से इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठा है राहुल
राहुल ने बताया कि बिकरू कांड के बाद उसने सुनील के बैनामे को कोर्ट में चुनौती दी। सुनील वर्तमान में अपनी पत्नी समीक्षा के साथ उन्नाव में रहता है। राहुल के मुताबिक सुरक्षा के नाम पर उसे केवल एक सिपाही दिया गया है। इस कारण वह न्यायालय में चल रहे वादों की सुनवाई में भी जाने में डरता है। फिलहाल जमीन को सरकार ने धारा 145 के तहत कब्जे में ले रखा है। अब तो कोर्ट से ही इंसाफ की उम्मीद है।

करोड़ों की संपत्तियां अभी भी नहीं हो सकीं सीज
गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गैंग की अवैध तरीके से कमाई गई करोड़ों की संपत्तियों को पुलिस अब भी सीज नहीं कर सकी है। इसमें सबसे बड़ा उदाहरण स्वरूपनगर स्थित भवन संख्या- 7/148 शर्मा नर्सिंग होम के सामने 1300 वर्ग गज की संपत्ति है। बिकरू कांड के तीन साल बाद मधु राजपूत नाम की महिला ने पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से शिकायत की थी।

जबरन करा लिया था प्लॉट का एग्रीमेंट
आरोप था कि विकास दुबे ने उनके पिता शत्रु राजपूत से जबरन इस प्लॉट का एग्रीमेंट करा लिया था। इसके बाद से पिता गायब हो गए और पूरा परिवार सड़क पर आ गया था। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर स्वरूपनगर एसीपी को जांच सौंपी गई थी।
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जांच में साफ हो गया था कि यह संपत्ति विकास दुबे के नाम है
जांच में साफ हो गया था कि यह संपत्ति विकास दुबे के नाम है। इसके बाद भी इसे सीज नहीं किया गया। इस संपत्ति की कीमत ही 100 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है क्यों कि यह संपत्ति कानपुर के सबसे पॉश इलाके में है। इसके अलावा भी कई संपत्तियां सीज नहीं हो सकी है।
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