एक माह से चल रहा था कारोबार
पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि हैवतपुर गढि़या कांशीराम कालोनी के एक मकान में ये लोग जाली नोट छापते थे। सौरभ यादव, सूरज उर्फ सूर्या व सुनील के माध्यम से नकली नोट 30 से 40 प्रतिशत वैध नोट लेकर बेच देते थे। एक माह से यह लोग जाली नोटों का कारोबार कर रहे थे।
पुलिस की भनक लगते ही सरगना हुआ फरार
गिरोह का सरगना पुलिस की भनक लगने पर फरार हो गया। पुलिस की टीमों ने दबिश मारी, लेकिन उसको पकड़ नहीं पाई। पुलिस ने तीन अन्य युवकों को भी पकड़ा था। उनको पूछताछ के बाद पुलिस ने छोड़ दिया। एसपी विकास कुमार ने बुधवार को नकली नोट छापने के संगठित गिरोह का खुलासा किया।
टीमों को 15 हजार का इनाम
उन्होंने बताया कि नकली नोट छापने वाले गिरोह का सरगना पकड़ में नहीं आया है। शीघ्र ही उसको भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। नकली नोट छापकर कहां सप्लाई करते थे और स्याही व कागज कहां से लाते थे। इसके बारे में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है। तीनों टीमों ने सराहनीय काम किया है।
गिरोह के पास से ये सामान हुए बरामद
पकड़े गए लोगों के पास से 100, 200 और 500 के 1.27 लाख रुपये के जाली नोट, 3100 की वैध नकदी, 11 पेज छपे नोट, एचपी डेस्क प्रिंटर, एक झोला जाली नोट की कतरन, कांच के तीन चौकोर टुकड़े, एक बिजली की प्रेस, एक एलईडी बल्व, तीन पेपर कटिंग चाकू, नोट रंगने के पांच ब्रुश, चार स्केल, एक कैंची, तीन हरे टेप, एक रबड़, चार गांधी जी की मोहर जिस पर 100, 200, व 500 लिखा था, तीन सफेद स्याही मोहर, एक डाटा केबल प्रिंटर वाली, चार मोबाइल, एक कार बिना नंबर की, दो नंबर प्लेट बरामद की हैं।