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Dengue in Kanpur: डेंगू के संक्रमण का फैलाव जारी, 22 रोगी और मिले, बिल्हौर बना हॉट स्पॉट

Tue, 08 Nov 2022 10:08 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में डेंगू का हमला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को डेंगू के 22 रोगी और मिले हैं, जिनमें 16 रोगी शहर के हैं। डेंगू संक्रमण का लगातार फैलाव मलेरिया विभाग की विफलता को उजागर कर रही है।  वहीं, बिल्हौर हॉट स्पॉट बन चुका है, जहां सात संक्रमित मिले हैं।
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डेंगू बुखार के मामले - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में डेंगू के संक्रमण का फैलाव बढ़ रहा है। सोमवार को डेंगू के 22 नए रोगी मिले हैं। इनमें सात संक्रमित बिल्हौर के हैं। बिल्हौर का भीटी हवेली क्षेत्र डेंगू हॉट स्पॉट बन गया है। उर्सला और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 22 संक्रमितों की रिपोर्ट दी है। इनमें 16 नगर के हैं और छह दूसरे जिलों के हैं।

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दवा के छिड़काव के बाद भी बहुत से क्षेत्रों में दुबारा एडीज एजिप्टाई मच्छर डंक मार रहा है। सीएमओ डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि सीएचसी को भी अलर्ट कर दिया गया है। ओपीडी में जो भी डेंगू के लक्षणों वाले रोगी आएं, उनका सैंपल जांच के लिए उर्सला या मेडिकल कॉलेज भेजा जाए जिससे समय से रोगियों को इलाज मिल सके।
उर्सला की लैब ने 13 संक्रमितों की रिपोर्ट दी है। इनमें बिल्हौर क्षेत्र के नसीरापुर, भीटी हवेली, अशोक नगर, बारामऊ के रोगी हैं। साथी ही मसवानपुर, बेनाझावर, कल्याणपुर क्षेत्र के रामसिंह का पुरवा, बारासिरोही के संक्रमित हैं। शुक्लागंज, उन्नाव के एक रोगी को भी डेंगू की पुष्टि हुई है।

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मेडिकल कॉलेज से जारी रिपोर्ट में गुरुदेव, बर्रा, मरियमपुर, गजनेरपुर, पनकी के रोगी हैं। इसके अलावा कानपुर देहात के जग्गूपुरवा, उन्नाव और फर्रुखाबाद के रोगी डेंगू पॉजिटिव मिले हैं। जनवरी से अब तक डेंगू के 250 रोगी मिले हैं। इनमें 219 रोगी शहर के हैं और 43 रोगी ग्रामीण क्षेत्र के हैं।

डेंगू रोगियों की भरमार, सरकारी अस्पतालों के बेड खाली
डेंगू के डंक के शिकार तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन हैलट, उर्सला और कांशीराम अस्पताल के डेंगू वार्ड के  लिए आरक्षित बेड खाली पड़े हैं। हैलट में डेंगू के इतने रोगी नहीं मिल रहे हैं, जिससे यहां के एंटी वायरल दवाओं के प्रोजेक्ट को शुरू किया जा सके।

रोगी सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने से मना कर रहे हैं। कुछ रोगी डेंगू पॉजिटिव आते ही चले जा रहे हैं। रोगियों के परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ढंग से देखते नहीं हैं। बुलाने पर कोई सुनता नहीं है। इसके अलावा दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रही है। इसी वजह से रोगी भर्ती करने में परिजन डरते हैं।
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तीमारदारों बोले- ढंग से डॉक्टर नहीं देखते
सरकारी अस्पतालों में भर्ती रोगियों के तीमारदारों का कहना है कि डॉक्टर ढंग से रोगी को नहीं देखते। इसके अलावा कुछ पूछने पर ढंग से बात नहीं करते। इससे डर लगा रहता है। तीमारदारों का कहना है कि बाहर से दवाएं लानी पड़ती  हैं। सारी दवाएं नहीं मिल पातीं। अगर रोगी का ढंग से इलाज करें, तो वे दवाएं बाहर से खरीद लेंगे।
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