मेडिकल कॉलेज से जारी रिपोर्ट में गुरुदेव, बर्रा, मरियमपुर, गजनेरपुर, पनकी के रोगी हैं। इसके अलावा कानपुर देहात के जग्गूपुरवा, उन्नाव और फर्रुखाबाद के रोगी डेंगू पॉजिटिव मिले हैं। जनवरी से अब तक डेंगू के 250 रोगी मिले हैं। इनमें 219 रोगी शहर के हैं और 43 रोगी ग्रामीण क्षेत्र के हैं।
डेंगू रोगियों की भरमार, सरकारी अस्पतालों के बेड खाली
डेंगू के डंक के शिकार तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन हैलट, उर्सला और कांशीराम अस्पताल के डेंगू वार्ड के लिए आरक्षित बेड खाली पड़े हैं। हैलट में डेंगू के इतने रोगी नहीं मिल रहे हैं, जिससे यहां के एंटी वायरल दवाओं के प्रोजेक्ट को शुरू किया जा सके।
रोगी सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने से मना कर रहे हैं। कुछ रोगी डेंगू पॉजिटिव आते ही चले जा रहे हैं। रोगियों के परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ढंग से देखते नहीं हैं। बुलाने पर कोई सुनता नहीं है। इसके अलावा दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रही है। इसी वजह से रोगी भर्ती करने में परिजन डरते हैं।
तीमारदारों बोले- ढंग से डॉक्टर नहीं देखते
सरकारी अस्पतालों में भर्ती रोगियों के तीमारदारों का कहना है कि डॉक्टर ढंग से रोगी को नहीं देखते। इसके अलावा कुछ पूछने पर ढंग से बात नहीं करते। इससे डर लगा रहता है। तीमारदारों का कहना है कि बाहर से दवाएं लानी पड़ती हैं। सारी दवाएं नहीं मिल पातीं। अगर रोगी का ढंग से इलाज करें, तो वे दवाएं बाहर से खरीद लेंगे।