सीएचसी में ऑटो से उतरती प्रसूता, गोद में मृत बच्चे को लिए खड़ा पिता
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कानपुर के भीतर गांव विकास खंड क्षेत्र के रिंद नदी किनारे बसे परौली गांव में गर्भवती को लाने के लिए जब एंबुलेंस नहीं मिली तो पति ऑटो से सीएचसी के लिए चला। बिरसिंहपुर गांव किनारे रास्ते में ही प्रसव हो गया।
नवजात की मौत हो गई और प्रसूता की भी हालत बिगड़ गई। सीएचसी आते ही डाक्टरों की टीम ने प्रसूता का उपचार शुरू किया, जिससे उसकी हालत में कुछ सुधार हुआ। भीतरगांव विकास खंड के परौली गांव निवासी सतीश साहू अपनी पत्नी प्रीती (28) के साथ कानपुर में रहकर सब्जी का ठेला लगाता है।
दिवाली के दिन गर्भवती पत्नी और चार वर्षीय बेटे को लेकर परौली गांव आया था। पत्नी को दिवाली की रात से ही हल्का प्रसव दर्द शुरू हुआ। रविवार को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर एंबुलेंस को फोन लगाया पर नहीं लगा।
इस पर गांव की आशा बहू रामजानकी के साथ पत्नी को ऑटो से ही लेकर सीएचसी भीतरगांव के लिए चला। ऊबड़-खाबड़ सड़क पर बिरसिंहपुर गांव के पास प्रीति को ऑटो में ही प्रसव हो गया।
कुछ ही देर में जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ गई और नवजात बेटी की मौत हो गई। इसके बाद वे लोग सीएचसी भीतरगांव पहुंचे। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजय मौर्या ने स्टाफ नर्स के साथ जच्चा का उपचार करना शुरू किया। एएनएम मनुजा ने बताया कि सीएचसी आने के पहले ही नवजात की मौत हो गई थी। इलाज के बाद जच्चा प्रीती की हालत में सुधार है।
एंबुलेंस सुविधा का कंट्रोल सीएचसी भीतरगांव से नहीं है। कभी-कभी नेटवर्क खराब होने से कॉल नहीं हो पाती है। ऐसी स्थिति में आशा को स्थानीय सीएचसी के स्वास्थ्य विभाग को फोन पर सूचना देनी चाहिए थी। सीएचसी परिसर में मौजूद एंबुलेंस कर्मचारियों से अनुरोध कर प्रसूता को लाने की व्यवस्था की जाती। - डॉ. अजय मौर्या, चिकित्साधीक्षक, सीएचसी भीतरगांव