शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
आलाअधिकारियों ने शव को बाहर निकलवाया। भाई आशु ने बताया कि 16 वर्ष पहले वह सब नरैनी के कालिंजर मार्ग में बने मकान में रहते थे। पिता रमेश गुप्ता की 2006 में मृत्यु हो गई थी। एक साल बाद वर्ष 2007 में मां कुसुमलता घर छोड़कर चली गई थी।
सीओ बोले- प्रथम दृष्टया खुदकुशी का मामला
अपने साथ सबसे छोटे पुत्र बिहारी को भी साथ ले गईं थीं और खरौंच गांव में राजा करवरिया के साथ रहने लगी थीं। आंसू ने भाई की हत्या की आशंका जताई है। मृतक चार भाई एक बहन है। यह सबसे छोटा था।उधर, सीओ नितिन कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया कुएं में कूदकर खुदकुशी का मामला है।
20 लाख रुपये में बेचा था मकान
कोतवाली क्षेत्र के खरौंच गांव निवासी मृतक बिहारी की मां कुसुमलता ने बताया कि बिहारी घर में दूध और खोए का काम करता था। ऑटो चलाकर गांव से दूध ले जाकर नरैनी बेचा करता था। उन्होंने बताया कि कालिंजर मार्ग पर बने मकान को तीनों भाइयों अंशु, आशु, राकेश ने पिता की मौत के बाद लगभग 20 लाख रुपये कीमत में बेच दिया था।
नहीं दिया था छोटे भाई को हिस्सा
इसका हिस्सा अपने छोटे भाई बिहारी को नहीं दिया था। तीनों भाई वर्तमान समय में बांदा में रहते थे। मृतक बिहारी की बांदा निवासी मौसी रन्नो ने बताया कि मंगलवार की रात उसकी बिहारी से आखरी बार बातचीत हुई है। इसमें सब कुछ अच्छा बता रहा था। ऐसी कोई बात नहीं थी, जिससे वह आत्महत्या कर लें।