2012-14 के बीच चित्रकूट के बीहड़ में आतंक का पर्याय बने डकैतों के बारे में कुछ इंटरेस्टिंग बातें सामने आई हैं। उस दौरान डकैतों को पकड़ने के लिए 3 एनकाउंटर हुए थे, जिसके बाद ये इंटरस्टिंग बातें सामने आई हैं। आप भी इन्हें जानकर हैरान रह जाएंगे...    डकैतों ने परेशान होकर किया चैलेन्ज चित्रकूट में कभी 18 लाख के इनामिया डकैत सुरेश पटेल उर्फ बलखड़िया और 12 लाख के इनामिया जुग्गी पटेल का जबरदस्त आतंक था। ये हमेशा कांड करके बीहड़ के जंगलों में गुम हो जाते थे। इन्हें पकड़ने के लिए न जाने कितनी बार जंगलों में जबरदस्त कॉम्बिंग की गई लेकिन ये कभी हाथ नहीं लगे। इस दौरान उन टावरों को चिन्हित किया, जिनसे डैकतों की लोकेशन की खबर मिलती रहे। इसी से परेशान होकर डकैत ने बलखड़िया ने एक दिन किसी ऑपरेशन की कमांड संभाल रहे अफसर को फोन किया और बोला की चाहे जो कर लो, मुझे मार नहीं पाओगे। फोन पर दोनों के बीच काफी हॉट-टॉक हुआ।   तब तक डाकू का लोकेशन को ट्रैस कर लिया गया और तुरंत फोर्स को जंगल में उन्हें पकड़ने के लिए भेजा गया। यहां फोर्स के साथ डकैतों की मुठभेड़ हो गई, जो ढाई घंटे चली। बलखड़िया अपने गैंग के साथ मिलकर ऊपर की ओर से गोलियां चला रहे थे, वहीं नीचे से चट्टानों की आड़ लेकर सुरक्षाकर्मी गोलियां चला रहे थे। दोनों तरफ से 800 राउंड गोलियां चली। लेकिन बलखड़िया भागने में कामयाब रहा।  इसके बाद बलखड़िया के साथ सुरक्षाकर्मियों की एक और मुठभेड़ की रोमांचक घटना हुई। इस दौरान बलखड़िया गैंग ने गांव में एक बच्चे के सामने ही उसके दादा और पिता को गोली मार दी। यह घटनाक्रम दिल दहला देने वाला था इसलिए उसकी गूंज भी दूर तक गई। बलखड़ियां जहां दहशत का पर्याय बनने के लिए ऐसी वारदात को अंजाम दे चुका था ये उसी पर भारी पड़ गया। अब बलखड़िया के खिलाफ कॉम्बिंग और तेज कर दी गई। घटना के बाद लगातार दो दिन डकैत की तलाश जारी रही। 'तीसरे दिन दोपहर को जंगल में एक बार फिर डकैत की मुठभेड़ सुरक्षाकर्मियों से हो गई। इस बार डाकू का काम तमाम करने का मंसूबा लिए ये सुरक्षकर्मी आगे बड़े थे। लेकिन उस वक्त मुश्किल खड़ी हो गई जब चारों तरफ से सुरक्षा टीम को डाकुओंं ने घेर लिया। ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। मदद के लिए अफसरों को फोन मिलाने की कोशिश की गई, लेकिन किसी का फोन नहीं लगा। किसी तरह आईजी जोन इलाहाबाद से संपर्क हुआ। उन्होंने एमपी पुलिस को सम्पर्क कर कवर देने के लिए बोला। तब जाकर ऑपरेशन में लगे सुरक्षाकर्मियों का हौंसला बड़ा और फिर....   जवानों में आ गया जोश जवानों में मानो जोश आ गया, फिर सभी ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके डकैतों को एमपी की ओर भागने को मजबूर कर दिया। टीम में कोई घायल नहीं हुआ। चित्रकूट जंगल से दोनों खतरनाक डकैत एमपी जंगल में भाग गए। कुछ दिनों बाद जंगल में ठिकाना न मिलने के कारण मध्य प्रदेश पुलिस ने दोनों को मार गिराया। इस मुठभेड़ के बाद डकैतों का काफी सामान बरामद किया और उनके लाइफ स्टाइल को जाना कि वो जंगलों में पत्थरों पर रोटी पकाकर खाते थे और पूरे जंगल में मात्र एक जल स्रोत से पानी पीते थे।