मंगलवार रात बर्रा में गोलियों से छलनी किया गया 14 साल का मासूम हीरालाल मौत से खूब लड़ा। तीन गोलियां शरीर से आर-पार होने के बावजूद वह स्ट्रेचर पर बैठकर ऑपरेशन थिएटर तक गया।
आठ घंटे की लंबी लड़ाई के बाद वह दुनिया को अलविदा कह चला, बस पीछे छोड़ गया तमाम सवाल। गोली मारने वाला कौन था? उसका क्या कसूर था? नन्हीं सी जान पर क्यों गोलियां झोंक दीं? इन सवालों का जवाब खोजने मंगलवार रात से जुटी थाना पुलिस घटनास्थल का ही पता नहीं कर सकी है।
बाईपास के एक घर के बाहर सीसीटीवी लगा मिला है। पुलिस का मानना है कि वारदात इसमें कैद हो सकती है। वहीं हरीलाल की मौत से उसके स्कूल के बच्चे डरे हुए हैं। प्रिंसिपल को यकीन ही नहीं हो रहा है कि कोई ऐसे होनहार के साथ ऐसा कर सकता है।
बर्रा दो हेमंत विहार निवासी मजदूर पीलाराम का पुत्र हीरालाल(14) मंगलवार रात बर्रा के रामजानकी मंदिर के चबूतरे पर घायल हालत में मिला था। उसे गोलियां मारी गई थीं।
हीरालाल ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि मंगलवार रात आठ बजे बर्रा बाईपास पर वह साइकिल की चेन चढ़ा रहा था तभी वहां पहुंचे बाइक सवार युवकों से उसकी रास्ते से निकलने को लेकर कहासुनी हो गई। बस, बाइक पर पीछे बैठे युवक ने उस पर गोलियां चला दीं।
पीठ पर तीन गोलियां लगने के बाद भी हीरालाल वहां से साइकिल चलाकर करीब 300 मीटर दूर राम जानकी मंदिर के चबूतरे तक पहुंचा और फिर गिर गया। फिर उसे हैलट ले जाया गया था। रात भर डॉक्टर उसे बचाने का प्रयास करते रहे लेकिन सुबह चार बजे उसकी मौत हो गई।
ओह माई गॉड... हीरा को किसने मारा...?
ओह माई गॉड... हीरा को किसने मारा...? हीरा तो बहुत ही होनहार और सीधा बच्चा था। मासूम बच्चे की किससे क्या दुश्मनी हो सकती है। यह बात कहते हुए ऑक्सफोर्ड मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल डब्ल्यू टू जूही बर्रा की प्रिंसिपल रीटा सिंह फफक पड़ीं।
कक्षा-6 में पढ़ने वाले हीरालाल की मौत की खबर सुनते ही स्कूल में शोक सभा के बाद छुट्टी कर दी गई। संचालक अशीष शर्मा ने दुखी परिवार को पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद करते हुए अन्य बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने का भरोसा दिलाया।
चार एक्सरे के बाद दिखी गोली
डॉक्टरों ने चार बार हीरालाल को एक्सरे के लिए भेजा, तब जाकर एक गोली एक्सरे में दिखाई पड़ी। पोस्टमार्टम में उसके शरीर से गोली निकाली जा सकी। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने लापरवाही की है।
डॉक्टर सही समय पर ऑपरेशन करते और इलाज में ध्यान देते तो बेटे की जिंदगी बच सकती थी। पीएम रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ पर चार गोलियां मारी गई थीं, जिसमें से तीन आरपार हो गईं और एक पेट में धंसी थी।
सीसीटीवी फुटेज का भरोसा
घटना के 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस को अभी तक घटनास्थल का ही पता नहीं चल सका है। बाईपास पर जहां हीरा शौच के लिए जाता था, उससे चंद कदम की दूरी पर कन्नौज के डिप्टी सीएमओ के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा है। पुलिस उस कैमरे की फुटेज खंगाल रही है।
वहीं रात भर सीओ गोविंदनगर घटनास्थल की खोज में भटकते रहे लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। न ही कहीं खून की एक बूंद दिखी।
इंजीनियर बनाना चाहते थे
मजदूरी कर परिवार को पाल रहे पीलाराम अपने बड़े बेटे हीरा को इंजीनियर बनाना चाहते थे। आर्थिक तंगी होने के बाद भी वह उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे। बेटे की हत्या के बाद से पिता के सारे सपने टूट गए। मां रामकील, छोटा भाई मूरत ध्वज और बहन नीतू सदमे से उभरे नहीं हैं।