रोते बिलखते मरने वाले बच्चों के परिजन
गंगा किनारे जानवर चरा रहे तीन बच्चे मिट्टी फटने से नदी में डूब गए। पास ही में मछली पकड़ रहे तीन मछुवारों ने नदी में छलांग लगाकर एक को बचा लिया। घंटों खोजने के बाद दो बच्चों की लाशें मिट्टी में दबीं मिलीं। पुलिस ने दोनों लाशों का पंचनामा कर परिजनों को सौंप दिया है।
उन्नाव के फतेहपुर चौरासी थानाक्षेत्र के अवस्थिन खेड़ा गांव निवासी रूपलाल रैदास का बेटा संदीप (14) , इसी गांव के रामशंकर का बेटा मिलन (13) और महावीर रैदास का बेटा अरुण (14) गांव से कुछ दूर खलक खेड़ा गांव के पास गंगा नदी के किनारे जानवर चरा रहे थे। वह तीनों गंगा के ठीक किनारे खड़े थे। इसी दौरान हाल ही में नदी में आई बाढ़ के चलते कटान के कारण मिट्टी का टीला ढह कर नदी में गिर गया। तेज आवाज होने पर पास ही नदी में मछली पकड़ रहे गांव के बड़क्के, रमेश, रामप्रकाश और सुरेश की नजर पड़ी तो अरुण को पानी में डूबते देखा वह तीनों भागकर पहुंचे और उसे डूबने से बचा लिया। बाहर निकालने के कुछ देर बाद हालत में सुधार होने पर अरुण ने संदीप और मिलन के भी डूबने की जानकारी दी। सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने उन दोनों की भी तलाश शुरू की। घंटो खोजने के बाद दोनों की लाश मिट्टी में दबी मिली। सूचना पर थानाध्यक्ष ब्रजमोहन व कानूनगो यशवंत सिंह मौके पर पहुंचे। परिजनों ने किशोरों के शव का पोस्टमार्टम न कराने की मांग की तो पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर दोनों शव परिजनों को सौंप दिए। देर शाम दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।
गांव में कोहराम
गांव में एक ही दिन में दो बच्चों की मौत से कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुराहाल हैं। मृतक संदीप पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर का था और कक्षा नौ का छात्र था। बेटे की मौत से मां तारावती व भाई-बहनों का रोरोकर बुराहाल है। पिता रुपलाल मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाता है। वहीं मृतक मिलन पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर का था। वह गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय कक्षा सात में पढ़ता था।