कानपुर-फर्रूखाबाद रेल ट्रैक पर मंधना स्टेशन के पास 31 दिसंबर की देर रात पटरी काटकर और पैंड्रॉल क्लिप खोलकर ट्रेन पलटाने की साजिश में आतंकी वारदात से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है। आशंका है कि 2 जनवरी को लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से पहले ऐसा करने में आतंकियों ने सिमी के स्लीपिंग माड्यूल्स का इस्तेमाल किया। शुक्रवार को घटना की जांच करने लखनऊ से आई सीबीआई टीम ने शुरुआती जांच के बाद ये आशंकाएं व्यक्त की हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर जांच करने आई सीबीआई टीम अपनी रिपोर्ट दिल्ली भेजेगी। वहां के निर्देश के बाद आगे जांच होगी। इस मामले में अमर उजाला ने पहले ही आतंकी साजिश होने की आशंका जताते हुए खबरें प्रकाशित कीं थीं। दोपहर करीब 12:10 बजे सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम मंधना रेलवे स्टेशन से कल्याणपुर की ओर दो किलोमीटर दूरी पर स्थित घटनास्थल खंभा नंबर 16/1 पर पहुंची। टीम ने वारदात के बाद घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे ट्रैकमैन संजीव कुमार, रामराज, सीनियर सेक्शन इंजीनियर जहीर खान और मंधना स्टेशन मास्टर दर्शन सिंह से वारदात की पड़ताल की। टीम ने घटना के सीन को रीक्रिएट कराया। आसपास के गांवों, स्कूल-कॉलेज, यहां रहने वालों, पटरी तक पहुंचने के रास्तों, उस दिन के मौसम, पैंड्रॉल क्लिपों, जॉगल फिश प्लेट (दो पटरियों को जोड़ने के लिए लगाई गई क्लिप) आदि की डिटेल जुटाई। टीम ने आरपीएफ और स्थानीय पुलिस की जांच के निष्कर्षों से बारे में भी जाना। आरपीएफ और स्थानीय बिठूर थाने के जांच अधिकारियों के बयान दर्ज किए। आरपीएफ और बिठूर थाने में दर्ज एफआईआर की कॉपी भी ली। टीम ने बगदौधी बांगर गांव के ग्राम प्रधान से भी पूछताछ की।