पिता की प्रेमिका के कत्ल में 36 साल बाद बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया। इससे पहले निचली अदालत से भी आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया था। इस पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
कानपुर के कर्नलगंज इलाके में रहने वाले चंद्रशेखर बाजपेई प्राइवेट काम करते था। वह शादीशुदा था, लेकिन इसके बाद भी उसका राजकुमारी नाम की युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस बारे में उसके बेटे दिलीप को पता चला तो वो आगबबूला हो गया। उसने पहले तो पिता को राजकुमारी से मिलने से मना किया, लेकिन जब उन्होंने उससे मिलना बंद नहीं किया तो उसने 4 सितंबर 1980 को राजकुमारी की हत्या कर दी। इसके बाद वो फरार हो गया।
पुलिस ने 1981 में उसको गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन वो छह दिन में ही जमानत पर छूट गया। इसमें लोवर कोर्ट से उसको आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के विरोध में उसने हाईकोर्ट में अपील कर दी। जहां से वो बरी हो गया। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को हाईकोर्ट के निर्णय को खारिज कर दिलीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मार्च 17 में दिलीप को दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।