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छेड़छाड़ के विरोध पर गोली मारी

Thu, 17 Dec 2015 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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नौबस्ता थाने के पीछे मछरिया बाबानगर में बुधवार शाम छेड़खानी का विरोध करने पर कर्नलगंज के हिस्ट्रीशीटरों ने लड़की के पिता को गोली मार दी। इतना ही नहीं, बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ आठ-दस राउंड हवाई फायरिंग की और भाग निकले। बाद में पुलिस पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया।
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थानाध्यक्ष राजदेव प्रजापति का कहना है कि गोली बुजुर्ग के हाथ में लगी है। पुरानी   रंजिश की भी बात सामने आई है, जिसके चलते आरोपियों के खिलाफ जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया है।

बाबानगर निवासी गोश्त विक्रेता वसीम ने पुलिस को बताया कि सुबह उसके चाचा की लड़कियां घर के पास खड़ी थीं, तभी बेकनगंज निवासी एनुद्दीन ने छेड़खानी कर दी। उसने विरोध किया तो अपने एक साथी के साथ एनुद्दीन ने उसको पीट दिया। मोहल्ले वालों ने बीच बचाव कर मामला शांत करा दिया।
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शाम को एनुद्दीन अपने साथियों हिस्ट्रीशीटर बेकनगंज निवासी बदरूद्दीन, हिस्ट्रीशीटर इजराइल आटेवाला, कर्नलगंज छोटे मियां का हाता निवासी वसीक (शाहिद नाटे का भाई) समेत आठ दस लोगों के साथ बाइकों से आया और उसे दुकान से बाहर खींचकर कनपटी पर पिस्टल लगा दी।

तभी चाचा मो. आजम उसे बचाने आ गए तो वसीक ने चाचा पर ही पिस्टल से फायर झोंक दिया। गोली चाचा के हाथ में लगी। इलाकाई लोग दौड़े तो ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए हमलावर बाइकों पर सवार होकर भाग गए। एसओ का कहना है कि घरवाले हिस्ट्रीशीटरों पर आरोप लगा रहे हैं, तहरीर लेकर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।

अपराधियों का गढ़ बन रहा मछरिया
कर्नलगंज और बेकनगंज के शातिर बदमाशों की आवाजाही से इतना तो साफ हो गया है कि मछरिया इलाका अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। इससे पहले मोनू पहाड़ी का आना-जाना मछरिया में रहा है। शहर के तमाम क्षेत्रों के अपराधी, अपराध करने के बाद मछरिया में पनाह पाते हैं और कुछ पुलिस वाले भी इनको संरक्षण देते हैं।

शाहिद की हत्या में पीड़ित परिवार नामजद
गोश्त विक्रेता ने बताया कि शाहिद नाटे की हत्या में उसके पिता, मामा और मामा के दो लड़के जेल में हैं। मालूम हो कि चार साल पहले वसीक के भाई शाहिद की कर्नलगंज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तब से दोनों परिवारों के बीच रंजिश चल रही है। 

30 मिनट तक उत्पात
हिस्ट्रीशीटरों ने करीब तीस मिनट तक बाबानगर क्षेत्र में जमकर तांडव किया। इस दौरान न तो कहीं कोई सिपाही दिखाई दिया और न किसी गाड़ी का हूटर सुनाई दिया। पुलिस के पूछने पर मोहल्ले वाले हमलावरों का नाम तक लेने से कतराते रहे।
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किससे मिलने आया था एनुद्दीन
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि हिस्ट्रीशीटरों को बाबानगर लाने वाला एनुद्दीन आखिर यहां किससे मिलने और क्यों मिलने आया था।
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