अभी भी नहीं मिला सिर, पटेल नगर चौराहा जाम कर नारेबाजी
राकेश ने बताया कि चचेरे भाई वीरेंद्र उर्फ टिंकू के पिता वृंदावन ने अपने हिस्से की प्रापर्टी सालों पहले बेच डाली थी। उसके पिता ने गुजर-बसर के लिए बिना किराया दुकान और पीछे का प्लाट वीरेंद्र को दे दिया था। दुकान में वीरेंद्र और उसका बेटा कुनाल चाट बेचते थे। करीब सवा महीने पहले 27 जून को वीरेंद्र ने 36 लाख रुपये में दुकान व प्लाट का बैनामा पटेल नगर के यादव मेडिकल स्टोर संचालक अनिल कुमार यादव, डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह व उनकी पत्नी माया के नाम कर दिया। बैनामा में वीरेंद्र की मां राजरानी और हुसैनगंज थाने के बेरागढ़ीवा निवासी अभिषेक कुमार तिवारी गवाह हैं। पिता बैनामा निरस्त कराने को कह रहे थे। आरोप है कि इसी विवाद में पिता की हत्या की गई है। पुलिस ने राकेश की तहरीर पर रविवार रात साढ़े नौ बजे वीरेंद्र, कुनाल, अनिल यादव, डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, माया सिंह, अभिषेक व राजरानी पर फर्जीवाड़ा कर जमीन खरीदने बेचने और अपहरण की एफआईआर दर्ज की है। कोतवाल शैलेंद्र सिंह ने बताया सभी आरोपियों पर अपहरण की एफआईआर को हत्या में तरमीम किया जाएगा।
सिर फैक्ट्री एरिया के नाले में फेंका
पुलिस की पूछताछ में वीरेंद्र के बेटे कुनाल ने शिक्षक के सिर को मलवां थाना क्षेत्र के फैक्ट्री एरिया के नाले में फेंकना कबूल किया। पुलिस कुनाल को लेकर मौके पर पहुंची। सिर फेंकने की जगह कैंची मोड़ नाले में बताई गई। इलाकाई सफाई कर्मियों को लगाकर पुलिस ने नाले में खोज चालू कराई। कोतवाली और मलवां पुलिस करीब पांच घंटे सिर की तलाश में जुटी रही। पर, विफलता हाथ लगी। कुुनाल ने पुलिस को बताया कि वह पन्नी में सिर रखकर बाइक से अकेले फेंकने के लिए आया था।।
पटेल नगर चतुरीपुरवा निवासी होरीलाल मौर्या ने जिन अपनों को रहने की जगह, कमाने का साधन दिया, उन्हीं अपनों ने बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। लापता होने वाले दिन भी पौत्र को अपना मानकर ही वह उसके साथ चले गए थे। प्रापर्टी बेचने का मामला उजागर होने के बाद भी वह किसी तरह की भतीजे वीरेंद्र या उसके परिवार पर कार्रवाई नहीं चाहते थे। सिर्फ बैनामा कैंसिल करने का दबाव बना रहे थे। यह बात इतनी नागवार गुजर जाएगी इसका अंदाजा उन्हें नहीं था। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान कुनाल के जुर्म कबूल करते ही पुलिस के होश उड़ गए। फौरन पुलिस ने मृतक शिक्षक के बेटे राकेश को बुलाया। पुरानी तहरीर की तारीख बदलाई। तहरीर को फटाफट कंप्यूटर में दर्ज एफआईआर लिख डाली। तहरीर में राकेश ने साफ तौर पर लिखा है कि उसने एक अगस्त को तहरीर दी थी लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की।
डिप्टी सीएम तक पहुंचा मामला
शिक्षक के बेटे राकेश ने बताया कि डिप्टी सीएम केशव मौर्या और कृषि राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह से पिता की तलाश में पुलिस के हीलाहवाली बरते जाने की शिकायत की गई थी। डिप्टी सीएम ने दो दिन पहले एसपी से बात की थी। एसपी के आदेश के बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस रात को कुनाल और उसके एक साथी को पटेल नगर चौराहे के पास से उठा ले गई थी।
बाबा चाट भंडार नाम से चर्चित दुकान
अतिक्रमण के चलते वीरेंद्र मौर्या की दुकान का आगे का हिस्सा टूट गया था। चाट विक्रेता वीरेंद्र की दुकान बाबा चाट भंडार नाम से बहुत चर्चित दुकान थी। इस दुकान से वीरेंद्र की औसतन दस हजार रुपये की बिक्री रोज की थी। दुकान में भीड़ लगाकर लोगों खाने आते थे। पहले वीरेंद्र के पिता वृंदावन दुकान चलाते थे। वह बाबा के भेष में रहते थे। उनके नाम से दुकान चर्चा में आई थी। उनके देहांत के बाद से वीरेंद्र व उसके बेटे कुनाल ने दुकान संभाल ली थी।
संचालक पीड़ित परिवार के साथ दिखा
फर्जीवाड़ा कर बेचे प्लाट व दुकान को डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने अपनी पत्नी माया सिंह और यादव मेडिकल स्टोर संचालक अनिल कुमार यादव ने मिलकर खरीदा था। संचालक अनिल कुमार यादव माच्र्युरी हाउस में पीड़ित परिवार के साथ दिखाई दिए। संचालक ने बताया कि वीरेंद्र ने उसे दुकान बनवाने का पास नक्शा और असिस्टमेंट, बिजली बिल, पानी टैक्स समेत कई दस्तावेज दिखाए थे। उसने बताया कि जगह पुश्तैनी होने के कारण पुराने दस्तावेज नहीं है। इन्हीं कागजातों से मालिकाना हक है। उसी आधार पर दुकान 36 लाख में खरीदी थी। कैश के तौर पर 25 लाख दिए थे। बाकी रकम बाद में देना था। उनके सामने फर्जी तरीके से दुकान बेचने की बात आई तो वह खुद वीरेंद्र के पास गए थे और बैनामा कैंसिल कराने की बात कही थी। उधर, डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने कागज को ही सही मानकर सौदा किया था। उन्हें क्या पता था कि यह विक्रेता गोलमाल कर रहा है। उन्हें फर्जी इस मामले में फंसा दिया गया।
शिक्षक का एक बेटा जेई
सेवानिवृत्त शिक्षक का बड़ा बेटा मुकेश इलाहाबाद के शंकरगढ़ में बिजली विभाग में जेई के पद पर तैनात है। पिता का शव मिलने की खबर पर पहुंचा। मुकेश की पत्नी की बहन मालादीप की जाम के दौरान पुलिस से जमकर नोकझोंक हुई। उसने पुलिस की घटनाक्रम में लापरवाही बरतने को कोसा। दूसरा बेटा राकेश एक दुकान में कंप्यूटर आपरेटर का काम करता है।
अपहरण की रात ही हत्या
प्रापर्टी विवाद सुलझाने की बात कहकर कुनाल बाबा को ले गया था। उसके बाद प्लाट दिखाने के बहाने से कुनाल बाबा को वहां ले गया था। अपहरण की रात ही बाबा की हत्या की गई। गर्दन का हिस्सा ठिकाने लगाने के बाद धड़ को दूसरी जगह फेंकने की योजना थी। धड़ का हिस्सा काफी बड़ा होने के कारण दूर ले जाना मुश्किल था। उसने पिता के साथ शव को पुआल के ढेर में प्लाट के अंदर ही छिपा दिया था। हत्यारोपियों से पुलिस की पूछताछ जारी है।
ढाई घंटे बाद छूटा जाम कोतवाली पहुंचे
पटेल नगर चौराहे पर एएसपी विनोद कुमार के पहुंचने के बाद जाम छुड़वाया जा सका। एएसपी ने परिजनों को आश्वासन दिया कि पुलिस सिर की तलाश में लगी है। उसे जल्द ही खोज निकाला जाएगा। कोई आरोपी बख्सा नहीं जाएगा। सारे आरोपी गिरफ्तार किए जाएगे। रोड से हटने के बाद परिजन कोतवाली पहुंचे। वहां एएसपी और परिजनों के बीच लंबी वार्ता हुई। पोस्टमार्टम हाउस से सोमवार देर शाम तक परिजनों ने शव को नहीं उठाया।