फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अाश्रम जहां रात काे गाड़ियां अाने के बाद शुरू हाे जाती थी लड़कियाें के चीखने-चिल्लाने की अावाज

Sun, 24 Dec 2017 03:28 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
बाबा वीरेन्द्र देव दीक्ष‌ित का अाश्रम
विज्ञापन
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में तहखानों की कमी नहीं है। यहां हर कदम पर एक तहखाना है अाैर हर तहखाने में सैकड़ाे राज दफन हैं। पुलिस को भी तहखानों का राज समझ में नहीं आया। पुलिस ने एक के बाद एक कई तहखानाें का ताला तोड़ कर तलाशी ली। यहां रात काे गाड़‌िया अाने के बाद लड़क‌ियाें के चीखने-च‌िल्लाने की अावाजें अानी शुरु ‌हाे जाती थी। हर काेई इस राज काे जानना चाहता है। 
विज्ञापन

 

अाश्रम नहीं तहखानाें का भूल भुलैया है

घटनास्थल पर जांच करती पुल‌िस
सिकत्तरबाग में तीन मंजिल का आश्रम बना है। प्रत्येक मंजिल पर तहखाने हैं। एक तहखाना रसोईघर के पास व दूसरा जीने के पीछे मिला। दूसरी मंजिल पर नौ तहखाने व तीसरी मंजिल पर पांच तहखाने मिले। छत पर तलाशी करने पहुंचे पुलिस कर्मियों को दो तहखाने मिले। एक खुला था तो दूसरे में ताला पड़ा था। बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम चारों ओर से लोहे के जाल और जाल से सील है। इनमें हवा के अलावा पक्षी तक नहीं जा सकता है। सिकत्तर बाग और कंपिल के चौधरियान मोहल्ले में बाबा वीरेंद्र देव के बने आश्रम चारों ओर से सील है। इन आश्रम में चारों ओर लोहे की जाली लगी हुई है। जो जाली काले रंग की चादर से सील है।

 

रात में काराें के अाने के बाद सुनाई देती हैं चीखें

पुल‌िस के साथ जाती अाश्रम में रहने वाली मह‌िला
बाबा वीरेंद्र देवे दीक्षित के कंपिल और सिकत्तरबाग आश्रम के गेट दिन में बंद रहते है। इस आश्रम से दिन के उजियारे में कोई भी निकलता हुआ स्थानीय लोगों को नजर नहीं आता है। रात के अंधेरे मेें जब सभी लोग सो जाते है तब आश्रम का गेट खुलाता और यहां लोग आते और जाते है। मोहल्ले के लोगों को कहना है कि रात के समय आश्रम से गाड़ियों से लोग आते है। रात में हीं वापस चले जाते है। कभी-कभी चिल्लाने की आवाजे भी रात के समय आती है। आश्रम चारों ओर से बंद होने के कारण अंदर क्या होता है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाती। सिकत्तरबाग आश्रम में मुंबई की रहने वाली संवासनी ज्योति ने तलाशी के समय कहा कि यह समाज लुटेरों का जंगल है।

 

संवासनियों को रात के अंधेरे में अाश्रम से भेजा जाता है बाहर

अाश्रम की तलाशी लेती पुल‌िस
इस कारण आश्रम की सुरक्षा को कड़े इंतजाम किए गए है। यहां ज्ञान दिया जाता है। जो ज्ञान लेना चाहते है, उनको हीं प्रवेश दिया जाता है। बाहरी लोग आकर परेशान करते है। बाबा वीरेंद्र देव भ्राता है। वह ज्ञान देने आते है। मोहल्ला चौधरियान निवासी तेजसिंह यादव का कहना है कि जब-जब आश्रम की गतिविधियों को लेकर विरोध किया तो मोहल्ले के लोगों के खिलाफ आश्रम से अनुयायी झूठा मुकदमा लिखा देते है। अभी तक करीब 27 लोगों के खिलाफ मुकदमे लिख चुके है। पुलिस भी ठीक से जांच करने में लापरवाही बरतती है। बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित पर शिकंजा कसते ही आश्रम से संवासनियों को रात के अंधेरे में बाहर भेजने का सिलसिला करीब तीन दिन से चल रहा है।

 

रात के सयम गाड़‌ियाें में बैठकर जाती हैं संवासनियां

अाश्रम में मह‌िलायें
कंपिल के चौधरियान मोहल्ले के लोगों की माने तो तीन दिन से रात के सयम गाड़ी आती है और यहां से संवासनियां उनमें बैठाकर ले जाती है। यह सिलसिला करीब तीन दिन से चल रहा है। शहर के सिकत्तर बार में स्थित आश्रम के आसपास रहने वाले लोगों की माने तो गुरुवार की रात दो-तीन गाड़िया आई। इन गाड़ियों से करीब 40 संवासनियों को बाहर भेज दिया गया। बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित व उनके अनुयायियों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज है। इसमें दुष्कर्म, लड़की को भगाने और धोखाधड़ी जैसे मामले है। विद्युत उपकेंद्र रूटौल के तत्कालीन जेई ओएन राय ने 16 अप्रैल 1998 को बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

 

गिरफ्तार होकर जेल गए थे वीरेंद्र देव दीक्षित

अाश्रम में मह‌िलायें
इस मामले में वीरेंद्र देव दीक्षित गिरफ्तार होकर जेल गए थे। पुलिस ने जांच कर आरोप पत्र दाखिल किया था। कंपिल थाने के तत्कालीन एसओ विजय सिंह ने वर्ष 1998 में सरकारी कार्य में बाधा डालने व अन्य अपराधिक धाराओं में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। मथुरा की रहने वाली एक युवती ने वर्ष 1998 में वीरेंद्र देव दीक्षित, इनकी पत्नी कमलादेवी के खिलाफ धारा 376, 120 बी, 109, 114 आईपीसी के तहत कंपिल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें भी आरोप पत्र दाखिल किया गया।


 
विज्ञापन

1998 में दर्ज कराई थी दुष्कर्म की रिपोर्ट

अाश्रम जाती पुल‌िस
दिल्ली की रहने वाली एक युवती ने वीरेंद्र देव दीक्षित और दो अन्य लोगों के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट वर्ष 1998 में दर्ज कराई थी। इसमें भी पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। जिला अहमदाबाद की रहने वाली एक युवती ने 1998 में वीरेेंद्र देव समेत तीन लोगों के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हरियाणा और कर्नाटक वाली दो युवतियों ने भी वीरेंद्र देव व अन्य के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अलावा धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें