फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये है केडीए का नया ‘खेल’, वेबसाइट से रातों-रात गायब ‘अवैध निर्माणों का रिकॉर्ड’

Sun, 05 Feb 2017 12:59 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
केवल तीन साल पहले का ही रिकार्ड नजर आ रहा हैं
विज्ञापन
कानपुर के जाजमऊ में हुए हादसे के बाद विकास प्राधिकरण के अफसरों ने अपनी जान बचाने को एक और बड़ा खेल कर दिया है। केडीए की वेबसाइट से दो जोनों में अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाई के सारे रिकॉर्ड गायब कर दिए गए हैं।  
विज्ञापन


वेबसाइट में दो अन्य जोनों के पेजों में तीन साल पहले का ही रिकॉर्ड नजर आ रहा है। अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए ऐसा किया, जबकि केडीए अफसर इसे अगले हफ्ते अपडेट कराने की बात कह रहे हैं। केडीए की वेबसाइट kdaindia.co.in में शहर के चारों जोनों में केडीए की तरफ से अवैध निर्माणों के खिलाफ की र्गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा रहता था। इसमें जोन, निर्माणकर्ता का नाम, पता, सीलिंग की तारीख आदि शामिल है।

महताब आलम की अवैध बिल्डिंग का रिकॉर्ड था
प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार 1 फरवरी तक वेबसाइट में यह रिकॉर्ड था, पर गज्जूपुरवा में सपा नेता महताब आलम की तरफ से अवैध रूप से बनवाई जा रही इमारत गिरने के बाद प्रवर्तन विभाग ने खुद की गर्दन फंसते देख यह रिकार्ड गायब कर दिया। परदेवनपुरवा जोन-1 में आता है। इसलिए वेबसाइट में इस जोन-1 का पेज ही नहीं खुल रहा है। इसी तरह सर्वाधिक अवैध निर्माण के मामले में दूसरे नंबर वाले जोन-4 का भी पेज नहीं खुल रहा है। जोन-2 और 3 का पेज खुल भी रहा है तो इसमें से जोन-2 के पेज में सन् 2012-13 में 54 अवैध निर्माणों पर की गई कार्रवाई का ही रिकार्ड उपलब्ध है। इसी तरह जोन-3 के पेज में उसी साल 61 अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाई का रिकार्ड नजर आ रहा है। केडीए अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि बाबुओं को अवैध निर्माणों के खिलाफ जोनवार हुई कार्रवाई का रिकार्ड  अपडेट करने को कहा गया है। अगले हफ्ते इसे वेबसाइट में अपलोड करा दिया जाएगा। 
विज्ञापन


पुलिस की गिरफ्त से बाहर हिस्ट्रीशीटर महताब
जाजमऊ हादसे के आरोपी हिस्ट्रीशीटर सपा नेता महताब आलम को चार दिन बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है। केवल लिखा पढ़ी में पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। इंस्पेक्टर संतोष सिंह का कहना है कि दबिश के दौरान महताब और ठेकेदार कोई भी अपने ठिकानों पर नहीं मिला है। उधर, सूत्रों का कहना है कि महताब आलम हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे लेने की फिराक में हैं। इसी वजह से उन्होंने कोर्ट में समर्पण की अर्जी है। पुलिस की रिपोर्ट कोर्ट में पहुंचने के बाद वह आगे की योजना पर काम करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें