आगरा में विस्फोट और ट्रेन पलटाने की साजिश का कनेक्शन सुरक्षा एजेंसियां कानपुर से जोड़ रही हैं। माना जा रहा है कि शहर में हुए रेल हादसों और अन्य आतंकी वारदात में शामिल रहे दहशतगर्दों का हाथ आगरा कांड में भी है। दूसरी ओर कानपुर और लखमऊ में आईएसआईएस आतंकियों के पकड़ने जाने का मामला हाथ में लेने के बाद नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीम रविवार को कानपुर आ सकती है। टीम दानिश, फैसल, सैफुल्ला, गौस मोहम्मद और आतिफ के घर जांच के लिए जा सकती है।
आतंकी वारदात में एक एनजीओ पर भी शक
कानपुर में रेल हादसों और आईएसआईएस के कानपुर-लखनऊ खुरासान मॉड्यूल की मदद करने में पोखरपुर लालबंगला की एक मुस्लिम एनजीओ का भी नाम एनआईए की जांच में सामने आया है। माना जा रहा है कि मुस्लिम धर्म के प्रचार-प्रसार की आड़ में एनजीओ आतंकी गतिविधियों में लिप्त है। शनिवार को एनजीओ का आफिस बंद रहा। कोई आया-गया नहीं। खास बात यह है कि शहर में जहां से आईएसआईएस आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है, उसी क्षेत्र में एनजीओ का हेडऑफिस भी है। शहर ही नहीं आसपास के जिलों में भी यह एनजीओ सक्रिय है। खुफिया अफसर इसके काम-काज और सदस्यों के बारे में टोह लेने में जुट गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक यहां पर एनजीओ से पहले मुस्लिम धार्मिक किताबों का केंद्र था, बाद में एनजीओ वहां से मुस्लिम धर्म के प्रचार-प्रसार का काम करने लगा। पड़ोसियों की मानें तो एनजीओ में सिर्फ मुस्लिमों का आना-जाना था। नमाज भई होती थी। अब एनजीओ शहर में मुस्लिम धर्म के प्रचार-प्रसार का काम करता है। जाजमऊ का एक बड़ा एक्सपोर्टर एनजीओ की मदद करता था। सूत्रों के अनुसार एनआईए इस बात से सबसे अधिक हैरत में है कि 20 नवंबर 2016 को पुखरायां में हुए पटना-इंदौर एक्सप्रेस हादसे के तुरंत बाद यह एनजीओ मदद के लिए मौके पर कैसे पहुंच गया। क्या इनको हादसे के बारे में पहले से मालूम था या ये लोग हादसे से पहले वहीं पर थे। इन कड़ियों की छानबीन के बाद एनआईए को दाल में कुछ काला मिला है। इसीलिए एनजीओ को जांच के घेरे में लिया गया है। एनजीओ के सभी पदाधिकारियों के मोबाइल स्विच ऑफ हैं। इसके अलावा शहर से गिरफ्तार किए गए आईएसआईएस आतंकियों का भी एनजीओ से नाता होने का पता चला है। नाम सामने आने के बाद से एनजीओ के आफिस पर ताला लग गया है। रोज की तरह शनिवार को यहां नमाज भी नहीं हुई।