पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने यूपी के कई शहरों से अपना कनेक्शन जोड़ रखा है। इसका खुलासा तब हुआ जब आईएसआई के गुर्गे गिरफ्तार हुए।
मध्य प्रदेश में दबोचे गए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के चार गुर्गों में से एक बलराम मूलरूप से बांदा का रहने वाला है। अब वह परिवार के साथ सतना (मध्यप्रदेश) में रहता है। सतना यूपी और एमपी का बॉर्डर है। उसकी रिश्तेदारी कानपुर में भी बताई गई है। इस बात का खुलासा करने के बाद एमपी पुलिस ने कानपुर, बांदा और आसपास के जिलों में उसके तार खंगालने शुरू कर दिए हैं। एमपी एटीएस के अफसरों ने यूपी पुलिस के अफसरों से संपर्क किया है।
नवंबर 2016 में हुई थी गिरफ्तारी
जम्मू के थाना आरएस पुरा इलाके में सतविंदर और दादू को नवंबर में पकड़ा गया था। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुफिया अफसरों को बताया था कि वे पाकिस्तान के कुछ लोगों के कहने पर पुलों, सेना कैंपों की तस्वीरें, जानकारी, सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वाहनों की सूचनाएं पाकिस्तान भेजता था। इस काम के लिए सतना का बलराम पैसे देता था। बलराम के अलग-अलग नाम से कई बैंक खाते हैं। बलराम के खातों में पैसा पाकिस्तान से आता था।
पाकिस्तान बात करता था
फर्जी टेलीफोन एक्सचेंजों से वह पाकिस्तान बात भी करता था। अब सतविंदर से पूछताछ के बाद पुष्टि होने पर एमपी एटीएस ने बलराम को गिरफ्तार किया है। इसके बाद सतना और ग्वालियर से दो और लोगों को पकड़ा गया है। पूछताछ में एमपी एसटीएस को बलराम ने बताया कि वह मूलरूप से बांदा का रहने वाला है। वहां उसकी 18 एकड़ जमीन भी है। बलराम से मिली इस जानकारी के बाद एमपी एटीएस ने उसका यूपी कनेक्शन तलाश करना शुरू कर दिया है। एटीएस को पता चला है कि बलराम के करीबियों, परिचितों और रिश्तेदारों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए हैं। इसके बाद बांदा के अलावा हमीरपुर, महोबा, कानपुर और उन्नाव में रहने वाले उसके रिश्तेदार और करीबियों पर एमपी एटीएस की नजर टिक गई है।