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पिटाई से घायल 'बंदर की हालत बिगड़ी', पशु चिकित्सकों ने मेडिकल रिपोर्ट डीएम को भेजी

Wed, 03 Jan 2018 05:13 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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घायल बंदर काे मरहम लगाता युवक
पिटाई से घायल बंदर की हालत खराब होती जा रही है। अब तो उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया है। कानपुर के रायपुरवा में बने पशु चिकित्सालय में उसका इलाज चल रहा है। दो दिन पहले इस बंदर को बेरहमी से पीटा गया था जिसके बाद जख्मी हालत में इसे अस्पताल लाया गया था।
 
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डंडों और पत्थर से पीटकर लहूलुहान कर दिया था

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घायल बंदर
कानपुर बर्रा के छेदी सिंह का पुरवा में सोमवार दोपहर शटरिंग कारीगर रघुवीर पाल ने लंगूर को डंडों और पत्थर से पीटकर लहूलुहान कर दिया था। मोहल्ले के धर्मेंद्र और राकेश गौड़ ने उसका प्राथमिक उपचार किया था। आरोपी मौके से भाग गया था। वन विभाग की टीम ने लंगूर को रायपुरवा स्थित पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया था। लंगूर का इलाज कर रहे डॉ. गौतम के मुताबिक लंगूर की हालत गंभीर बनी हुई है। वह खाना नहीं खा रहा है। सिर और चेहरे पर चोटों की वजह से उसे दिखाई भी नहीं दे रहा है। वह कुछ दूर चलकर गिर जाता है। 
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पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया

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खून से लथपथ बंदर
पीपुल्स फॉर एनीमल्स की जिलाध्यक्ष अर्चना त्रिपाठी ने लंगूर की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद डीएम सुरेंद्र सिंह, डीएफओ और पुलिस अफसरों से बातचीत की। आरोपी पर फौरन कार्रवाई सुनिश्चित कराए जाने का अनुरोध किया। इसके बाद हरकत में आए वन विभाग की तरफ से घटना की तहरीर दी गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया।

सात साल कैद से ज्यादा की सजा

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बंदर के मुंह से बहता खून
अर्चना त्रिपाठी ने बताया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा में सात साल कैद से ज्यादा की सजा है। पशु क्रूरता अधिनियम में तीन से सात की सजा का प्रावधान है। जीव को शारीरिक नुकसान पहुंचाने में एक साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम में सात साल से ज्यादा सजा का प्रावधान है। इसकी वजह से आरोपी को थाने से जमानत नहीं मिल सकी है।
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पीपुल्स फॉर एनीमल्स की जिलाध्यक्ष ने मांगी मेडिकल रिपोर्ट

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तड़पता बंदर
वन विभाग के अफसर भी पुलिस की तरह मामले को टरकाने की कोशिश करते रहे। वन विभाग के अफसरों ने पीपुल्स फॉर एनीमल्स की जिलाध्यक्ष अर्चना त्रिपाठी से कहा कि लंगूर की मेडिकल रिपोर्ट उनको दी जाए। इसके बाद ही विभाग की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद उन्होंने वन विभाग के अफसरों को लंगूर की मेडिकल रिपोर्ट सौंप दी। तब वन विभाग की तरफ से थाने में तहरीर दी गई।
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