शनिवार को बिरहाना रोड पर जीरा कंपनी लूट में शामिल फरार लुटेरे की पहचान मसवानपुर निवासी जावेद अंसारी के रूप में हुई है। जावेद एक पूर्व थानेदार का मुखबिर है।
मुखबिर और एसटीएफ सिपाही ही यह गैंग चला रहे हैं। रविवार सुबह एसटीएफ के सीओ मनीष सोनकर ने लूट के आरोपी अभिमन्यु सिंह, सुरेंद्र कुमार और एसटीएफ सिपाही अमरेंद्र प्रताप सिंह से घंटों पूछताछ की। उधर, बिरहाना रोड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में सरेशाम लूट के चलते बिरहाना रोड, नयागंज, जनरलगंज के व्यापारी सहम गए हैं।
शनिवार देर शाम बिरहाना रोड पर स्थित गुजरात की डी नटवरलाल जीरा कंपनी में एसटीएफ अधिकारी बनकर घुसे चार लुटेरों ने 15 लाख रुपये लूट लिए थे और कंपनी के दो कर्मचारियों को आफिस में बंद कर भाग निकले थे। दोनों कर्मचारियों ने अन्य लोगों की मदद से तीन लुटेरों को दबोच लिया था जबकि एक भाग गया था।
सीओ एसटीएफ मनीष सोनकर के मुताबिक कुछ पुरानी घटनाओं में भी एसटीएफ सिपाहियों पर आरोप लगे थे, अमरेंद्र से उन मामलों की भी पूछताछ की जा रही है। सिपाही के निलंबन के बारे मे सीओ एसटीएफ ने बताया कि पुलिस कस्टडी में 24 घंटे रहने पर स्वत: निलंबन हो जाता है। लूट और माल बरामदगी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका है। आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
जावेद की मुखबिरी पर की लूट
अमरेंद्र के मुताबिक जावेद से उसकी दोस्ती एक थानेदार के माध्यम से हुई थी। थानेदार तो फिलहाल गैर जनपद मे तैनात है लेकिन जावेद से उसका संपर्क बना हुआ था। जावेद ने ही बताया था कि कंपनी में हवाला कारोबार होता है जिसे लूटने में कोई रिपोर्ट भी नहीं लिखाएगा इसलिए वारदात कर डाली॥
सिपाही को चाचा कहते हैं दूसरे आरोपी
आरोपी अभिमन्यु और सुरेंद्र ने बताया कि अमरेंद्र की पीएसी में तैनाती के दौरान उससे दोस्ती हुई थी क्योंकि उन दोनों के पिता भी पीएसी में हैं। अमरेंद्र को वे लोग चाचा कहते हैं। सुरेंद्र और अभिमन्यु वान्या सिक्योरिटी में काम करते हैं और कानपुर क्लब में शाम 4 से रात 12 बजे तक बाउंसर की नौकरी करते हैं।
दोनों आरोपी बीए पास हैं और अभिमन्यु सुबह साईं एकेडमी की श्यामनगर और हरजिंदर शाखा मे काम भी करता है। सुरेंद्र की शादी तय हो चुकी है जो अब खतरे में पड़ गई है।
रोज 15 लाख का कलेक्शन रहता है
कंपनी के कर्मचारी दीक्षित पटेल ने बताया कि उसकी कंपनी का थोक का जीरा कारोबार है। कानपुर के व्यापारी ऑर्डर देते हैं और माल डिलीवरी की बाद दीक्षित और उसका सहयोगी पैसा कंपनी के बैंक अकाउंट में जमा कर देते हैं। दीक्षित ने बताया आमतौर पर रोज 10-12 लाख रुपये बैंक में जमा कराए जाते हैं
कहां गई सिपाही की पिस्टल
लूट का मुकदमा लिखाने वाले जीरा कंपनी के एजेंट दीक्षित पटेल ने बताया कि वारदात के समय आरोपी सिपाही पिस्टल लगाए हुए था लेकिन पुलिस की लिखापढ़ी में कहीं भी सिपाही की पिस्टल का जिक्र नहीं है। उसके पास से पिस्टल बरामदगी भी नहीं दिखाई गई है।
आरोपी एसटीएफ सिपाही अमरेंद्र 1993 में पीएसी मे भर्ती हुआ था। 2003 में वह जिला पुलिस में आया और मूलगंज, गोविंदनगर थानों में तैनाती केबाद 2007 में एसओजी में शामिल हुआ। अमरेंद्र के दो बेटे हैं जो कैंट के एक प्रतिष्ठित कानवेंट स्कूल में पढ़ते हैं।