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तीन दोस्त डूबे, दो की मौत, एक लापता

Fri, 23 Oct 2015 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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फीलखाना के गुप्तार घाट पर स्नान करते समय तीन दोस्त गंगा नदी में डूब गए। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने दो दोस्तों के शव निकाल लिए लेकिन तीसरे का पता नहीं चला है।
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मृतकों की पहचान कृष्णा नगर लखनऊ निवासी जितेंद्र श्रीवास्तव के बेटे अभिषेक (18) और मानकनगर के रामनगर मोहल्ले के राजीव वाजपेयी के पुत्र शांतनु (20) के रूप में हुई है। तीसरा लखनऊ के आलमबाग रेलवे कालोनी निवासी रेलवे कर्मी अजय श्रीवास्तव का बेटा मयंक (22) अभी लापता है।

वह लखनऊ के एक डिग्री कालेज में बीएससी का छात्र है। अभिषेक जय नरायण इंटर कालेज लखनऊ से इंटर की पढ़ाई कर रहा था। शांतनु बीएससी का छात्र था। तीनों गहरे दोस्त थे।
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पुलिस ने बताया कि गुरुवार दोपहर तीन युवक सरसैया घाट पहुंचे। वहां एक नाव पर बैठकर वे गुप्तार घाट पहुंचे। तीनों दोस्तों ने मोबाइल से सेल्फी ली। गुप्तार घाट पर तीनों युवक उतरे और एक स्थान पर कपड़े और जूते उतार कर स्नान के लिए गंगा नदी में उतर गए। तैरते हुए तीनों गहरे पानी में चले गए और पल भर में गंगा में समा गए।

घाट पर मौजूद नाविक प्रकाश ने एक युवक को पानी में गोते लगाते देखा तो वह नाव पर चार साथियों को लेकर उसे बचाने पहुंचा लेकिन वह फिर नजर नहीं आया। सूचना पाकर फीलखाना एसओ आरके त्रिपाठी फोर्स और गोताखोरों के साथ पहुंचे। गोताखोरों ने एक-एक कर दो युवकों को ढूंढ निकाला लेकिन दोनों युवकों की सांसें थम चुकी थीं।

एसओ ने बताया कि युवकों के बैग में कपड़ों और पैसों के अलावा तीन मोबाइल फोन और परिचय पत्र मिला। मोबाइल की फोन डॉयरी में मिले नंबरों से परिवार और रिश्तेदारों को घटना की सूचना दे दी गई है। एसओ ने बताया कि मयंक की तलाश के लिए शुक्रवार को दोबारा गोताखोर गंगा में उतारे जाएंगे।

‘15 हजार दो तो 15 मिनट में ढूंढ देंगे’
गंगा बैराज से आए प्राइवेट गोताखोरों ने संवेदनहीनता की हद पार कर दी। घाट पर पहुंचे मयंक के मौसरे भाई पुनीत श्रीवास्तव से वे बोले- ‘15 हजार रुपये दो तो 15 मिनट में लड़कों को ढूंढ देंगे, वरना इधर-उधर टहलते रहोगे।’

मयंक के मुताबिक, उनके हामी भरने के बाद ही गोताखोर गंगा में उतरे। फीलखाना एसओ आरके त्रिपाठी ने शुक्लागंज उन्नाव में रहने वाले निसार को डूबे लड़कों को तलाश करने बुलाया। निसार 10 लोगों की टोली के साथ गुप्तार घाट आए।

वहां मौजूद फीलखाना पुलिस से पारिश्रमिक के बारे में बात की, तो उन्हें मयंक के मौसेरे भाई पुनीत के पास भेज दिया गया। भाई के गंगा में डूबने की बात सुनते ही पुनीत ,उनके पिता प्रदीप घाट पहुंच गए थे। 15 हजार रुपये उनके पास नहीं थे जो वे निसार को दे सकते। पुनीत कुछ बोल पाता इससे पहले ही निसार ने कहा कि रुपये दो तो लड़कों को ढूंढ देंगे।

देर करोगे तो रात हो जाएगी। पुलिस के किनारा करने पर परेशान पुनीत ने निसार को पैसा देने के लिए हामी भरी। इसके बाद निसार की टोली के लोगों ने मयंक, अभिषेक और शांतनु की तलाश शुरू की।

इस दौरान पैसों का जुगाड़ किया। बता दें कि पिछले दिनों सिद्धनाथ घाट पर नाव पलटने से हुई 10 लोगों की मौत के बाद शवों को ढूंढने में मदद करने पर जिला प्रशासन ने गोताखोरों को सम्मानित किया था। इनमें ये लोग भी शामिल थे।

दो दिन पहले कानपुर आया था मयंक
मयंक दो दिन पहले कानपुर आया था। वह यशोदा नगर नौबस्ता में मौसी नीलिमा के घर में रुका था। मौसा प्रदीप ने बताया कि वह सुबह बाराह देवी मंदिर दर्शन कर लखनऊ वापस चले जाने की बात कहकर निकला था।

वह गुप्तार घाट कैसे पहुंचा। उसे दोस्त कहां मिले, वह कुछ नहीं बता सके। वहीं देर शाम घाट पर पहुंची मयंक की मां बेहोश हो गई। बाद में शवों की शिनाख्त में उन्होंने बताया कि इनमें मयंक नहीं है। उधर, देर रात पहुंचे शातंनु के घर वालों ने भी शव की शिनाख्त की।
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