पुलिस समेत विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती और शैक्षिक संस्थानों में दाखिले को आयोजित होने वाली परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले हाईटेक गैंग में प्रतियोगी छात्रों के अलावा एचबीटीआई के छात्र भी शामिल हैं।
इनके रविवार को हुई कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में झांसी में सॉल्वर बनकर बैठने का अनुमान है। गैंग के तार घाटमपुर के सॉल्वर गैंग के सरगना अभिषेक सचान से भी जुड़े हैं।
इसका खुलासा पकड़े गए जालसाजों और सॉल्वर गैंग से जुड़े चार लोगों से पूछताछ में हुआ है। इनका रैकेट पूरे देश में फैले होने का भी पता चला है। पकड़े गए लोगों में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले स्टूडियो और साइबर कैफे संचालक के अलावा एक सॉल्वर, फर्जीवाड़ा एवं साल्वरों के बीच मध्यस्थता करने वाला एक छात्र शामिल है।
पुलिस ने पूछताछ में जिन लोगों के नाम उजागर हुए हैं, उनके बारे में छानबीन शुरू कर दी है। सोमवार को एचबीटीआई जाकर पुलिस जांच करेगी।
आईजी आशुतोष पांडेय की स्पेशल टीम और कल्याणपुर पुलिस ने संयुक्त रूप से रविवार रात विकास नगर स्थित नवदुर्गा स्टूडियो और छपेड़ा पुलिया में बालाजी इंटरनेट कैफे पर छापा मारकर पुलिस के फर्जी आईकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के प्रवेश पत्र, माध्यमिक और डिग्री कालेजों की फर्जी मार्कशीट, प्रमाण पत्र, वोटर आईडी, वोटर कार्ड केहोलोग्राम, राजस्व विभाग से जुड़े दस्तावेज, विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती और शैक्षिक संस्थाओं में दाखिले से जुड़े कागजात और प्राफोर्मा, फार्म समेत तमाम कागजात बरामद किए थे।
पुलिस टीम ने स्टूडियो के संचालक विकास नगर कल्याणपुर निवासी धीरज सिंह और इंटरनेट कैफे के संचालक केशवपुरम कल्याणपुर निवासी विवेक कुमार निगम समेत छह लोगों को पकड़ा था।
एसओ कल्याणपुर आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती और शैक्षिक संस्थानों में दाखिले को आयोजित होने वाली परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने व फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले हाईटेक गैंग के मामले में स्टूडियो संचालक धीरज सिंह, साइबर कैफे संचालक विवेक कुमार सिंह, सिकंदरा (कानपुर देहात) के जमौरा गांव के सुबोध कटियार और मऊ के मधुबन थानाक्षेत्र के रमऊपुर निवासी राजेश यादव को गिरफ्तार किया गया है।
इनके कब्जे से चार सीपीयू, चार मोबाइल फोन, मेडिकल कालेज के डॉक्टरों, सरकारी अफसरों और विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों के प्रिसिंपलों की फर्जी मोहरे और तमाम फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
एसओ के मुताबिक विवेक और धीरज सिंह फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम करते थे। राजेश यादव सॉल्वर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के बीच मध्यस्थ था।
सुबोध कटियार सॉल्वर है। सुबोध अब तक बैंक समेत विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती परीक्षा में सॉल्वर के रूप में दूसरे की जगह परीक्षा दे चुका है। वह आरआरबी (रूरल बैंक कंबाइंड परीक्षा) पास कर चुका है।
एसओ ने बताया कि राजेश यादव से पूछताछ में पता चला है कि एचबीटीआई छात्र प्रखर, आशीष और आकाश भी सॉल्वरों के गैंग में शामिल हैं। गैंग का सरगना कौशल है।
कौशल ही फर्जी पहचान पत्र और प्रपत्र तैयार कराने का काम उसे सौंपता था। वह फर्जी दस्तावेज विवेक निगम से तैयार कराता था।
राजेश ने यह भी बताया है कि प्रखर और आशीष को रविवार को होने वाली यूपी पुलिस कांस्टेबल मेन परीक्षा में औन मोहम्मद व संदीप के स्थान पर झांसी में परीक्षा देनी थी।
इसके लिए प्रखर और आशीष ने फर्जी पहचान पत्र तैयार कराया था। नाम और पता असल अभ्यर्थियों का था और फोटो प्रखर और आशीष के लगाए गए थे।
राजेश के मुताबिक फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सॉल्वरों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने पर उसे खर्च के लिए पांच सौ से एक हजार रुपये मिलता था।
चमनगंज में रहने वाले राजू के भी गैंग में शामिल होने का पता चला है। राजू भी फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। एसओ का कहना है कि गैंग के तार दूसरे सॉल्वर गैंग के सरगना अभिषेक सचान से भी जुड़े होने के संकेत मिले है।
जिन सॉल्वरों के नाम प्रकाश में आए हैं, वे पूरे देश में नौकरी और शैक्षिक संस्थानों में दाखिले को होने वाली परीक्षाओं में असल अभ्यर्थी की जगह खुद परीक्षा देने जाते हैं। अभी मामले की जांच चल रही है।
विवेक निगम, धीरज सिंह, राजेश यादव और सुबोध कटियार को धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, सरकारी अभिलेख तैयार करने के आरोप में जेल भेजा गया है।