सपा नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की साली शांति देवी की मौत के बाद उनके खाते से रुपये निकाले जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। फर्जीवाड़े में शांति देवी के फौजी पुत्र के खाते से 45 हजार का फर्जी चेक लगाकर शांति देवी के खाते में ट्रांसफर कर शांति देवी के चेक द्वारा नकद भुगतान लिया गया।
मामले की जानकारी होने पर शांति देवी के पुत्र ने शाखा प्रबंधक को घटना की जानकारी देकर रुपये वापस दिलानेे तथा धोखाधड़ी करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मामले पर बैंक कर्मचारी कुछ कहने के स्थिति में नहीं हैं।
कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र के सनिहांपुर गांव में पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह की शाली शांतीदेवी की ससुराल है। शांति देवी की भी मृत्यु 26 मार्च 2016 को हो चुकी है। उनका एक बेटा बृजेंद्र सिंह सेना में है और वह जम्मू में तैनात है। उसका एक भाई जसवंत सिंह डेरापुर में भूमि विकास बैंक की शाखा में कार्यरत है। शांति देवी का एसबीआई शाखा डेरापुर में बचत खाता संख्या 10921620898 संचालित है। उसी शाखा में उसके पुत्र बृजेंद्र सिंह का खाता संख्या 020036202021 भी संचालित है।
27 जनवरी 2017 को बृजेंद्र के मोबाइल पर उसके खाते से मां शंातीदेवी के खाते में 45 हजार रुपये ट्रांसफर होने का मैसेज आया। उसे विश्वास नहीं हुआ कि उसके खाते से उसकी मां के खाते में उसके बिना हस्ताक्षर या अनुमति के रुपये स्थानांतरित हो जाएंगे। दो-तीन दिन बीतने के बाद उसने मामले को परिवारीजनों को बताया।
बृजेंद्र ने अपने भाई यशवंत सिंह ने एसबीआई शाखा पहुंचकर खातों के संबंध में जानकारी की तो पता चला कि बृजेंद्र के खाते से चेक द्वारा मां शांतीदेवी के खाते में 45 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए हैं, जब शांतीदेवी के खाते को देखा गया तो पता चला कि उसी शाखा से शांति देवी के नाम जारी की गई चेकबुक से दो चेकों के माध्यम 45 हजार रुपये नगद लिया गया। इस पर उसने इस पूरे मामले की शिकायत एसबीआई में प्रार्थनापत्र देकर दर्ज करवाई है।
शांति देवी के मौत के बाद फेंक दी थी चेकबुक
बृजेंद्र सिंह ने कुछ समय पहले एसबीआई से चेक बुक मंगाई थी। उक्त चेक बुक में खाता नंबर सही था परंतु नाम गलत राजेंद्र सिंह प्रिंट होकर आ गया था। इससे चेकबुक निष्प्रयोज्य मानकर घर में छोड़ दी थी। वहीं मां शांतीदेवी के मौत के बाद उनके खाते में करीब पांच सौ रुपये शेष थे। इसके चलते परिवारीजनों ने बैंककर्मियों को शांतिदेवी के मौत की सूचना दी थी। इसके बाद चेकबुक आदि कागज फेंक दिए गए थे। आशंका जताई जा रही है कि यही दोनों चेक बुक किसी के हाथ लग गए। इसने दोनों खातेदारों की निष्प्रयोज्य चेकों में फर्जी हस्ताक्षर कर धन आहरित कर लिया गया।
सवालों के घेरे में बैंक कर्मियों की भूमिका
डेरापुर। बैक में खाते या चेक से भुगतान के समय चेक बुक या विड्राल पर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान खाताधारक के खाता खोलने के समय बनाए गए दस्तावेजों से मिलान किया जाता है। हस्ताक्षर का मिलान होने के बाद विड्राल व चेकों का भुगतान किया जाता है। आश्चर्य यह है कि शांतिदेवी व बृजेश की चेकों पर किए गए फ र्जी हस्ताक्षरों का मिलान बैक अधिकारियों द्वारा नहीं किया गया। जबकि चेक में बृजेंद्र सिंह के स्थान पर राजेंद्र सिंह प्रिंट है।