इटावा पुलिस ने एक मकान में लंबे समय से संचालित अवैध कार्बनिक खाद फैक्ट्री पर छापा मारकर भारी मात्रा में निर्मित व अर्धनिर्मित कार्बनिक उर्वरक व नकली उर्वरक बनाने के उपकरण बरामद किए। इसके साथ नकली उर्वरक बनाने के धंधे में लिप्त पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया है। जबकि तीन अन्य आरोपी पुलिस को चकमा देकर मौके से भाग निकले।
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इटावा लबेदी थानाध्यक्ष अनिल यादव को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम विझावली गांव के बाहर सड़क के किनारे बने एक कमरे में लंबे समय से एक अवैध उर्वरक फैक्ट्री में नकली बायो उर्वरक बनाने का काम हो रहा है। थानाध्यक्ष अनिल यादव ने इसकी सूचना उपजिलाधिकारी चकरनगर जितेंद्र कुमार व जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव को दी। इस पर जिला कृषि अधिकारी थाना पहुंचकर पुलिस के साथ अवैध उर्वरक फैक्ट्री पर छापा मारा। इस दौरान अवैध फैक्ट्री में गैर कानूनी ढंग से बायो उर्वरक निर्मित होती पाई गई। पुलिस ने फैक्ट्री से भारी मात्रा में निर्मित व अर्धनिर्मित बायो उर्वरक बरामद करने के साथ-साथ उर्वरक बनाने के उपकरण भी बरामद किए। मौके से पुलिस ने फैक्ट्री संचालक रामेंद्र सिंह व उसके पुत्र सर्वेश को भी गिरफ्तार किया। जबकि इस धंधे में लिप्त तीन अन्य लोग मौके से पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे।
छापे के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव, क्षेत्राधिकारी भरथना विकास जायसवाल भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने फैक्ट्री से तकरीबन 500 से अधिक खाली बोरिया व झोले बरामद किए। इन पर किसान शक्ति बायोजाईम दानेदार कार्बनिक खाद अंकित बरामद किए हैं। बरामद थैलों में यह नकली कार्बनिक खाद पैक करके आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा आदि प्रदेशों के पश्चिमी जिलों में किसानों को बिक्री करने के लिए सप्लाई की जाती थी। पुलिस ने फैक्ट्री के उपकरण बरामद करने के साथ जेसीबी से फैक्ट्री को नष्ट कर दिया। थानाध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसका मुख्य संचालक कौन है। जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि इस कार्बनिक खाद की क्या गुणवत्ता है इसकी लैबोरेटरी पर जांच कराई जाएगी।
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जल्द अमीर बनने के लिए खोली फैक्ट्री
अवैध खाद फैक्ट्री में छापामारी के दौरान पकड़े गए बाप-बेटा
फैक्ट्री के संचालन में सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी के पुत्र के साथ-साथ आधा दर्जन अन्य लोगों के नाम प्रकाश में आए हैं। वह इस धंधे से जल्दी अमीर बनना चाहते थे। पुलिस के मुताबिक विझावली में पकड़े गए नकली कार्बनिक खाद के कारखाने का मुख्य संचालक सर्वेश व उसका एक करीबी रिश्तेदार एक वर्ष पूर्व आंध्रप्रदेश की एक कार्बनिक खाद फैक्ट्री में मार्केटिंग की नौकरी करते थे। किसानों में फसल के लिए कार्बनिक खाद की बढ़ती मांग को देखकर दोनों ने वहीं से नकली कार्बनिक खाद की कला सीखकर जल्दी ही करोड़पति बनने के लालच में अपने गांव के बाहर अपने नलकूप पर ही खाद बनाने का कारखाना लगा दिया।
नकली कार्बनिक खाद निर्माण कार्य से जुड़े इस सिंडिकेट ने साईं दरबार बायो फर्टिलाइजर आजाद नगर, कानपुर के नाम से एक कंपनी भी बना रखी थी, जो कि पूर्वांचल जनपदों के बेरोजगार युवाओं को वेतन और कमीशन देकर उनसे सीधे किसानों तक बिक्री कराने का कार्य करते थे। 8 किलो ग्राम वजन के थैले में पैक कार्बनिक खाद का मूल्य कथित कंपनी ने 845 रुपये निर्धारित किया था और इसकी बिक्री पर इस कंपनी से जुड़े बेरोजगार को 150 रुपये कमीशन व पांच हजार रुपये वेतन दिया जाता था।