दर्शनपुरवा और आसपास रहने वालों का ऐसा उग्ररूप पहले कभी नहीं देखा गया। जब भी इस तरह का संघर्ष हुआ मिश्रित आबादी वाले इलाकों में समुदाय विशेष के लोग आक्रामक दिखते थे और दूसरे समुदाय केलोग अमूमन बैक फुट पर चले जाते थे।
अब तक की पड़ताल के मुताबिक शनिवार को सुबह से शाम तक और दर्शनपुरवा से डिप्टी पड़ाव तक जो बवाल हुआ वो तात्कालिक उत्तेजना का नतीजा था। हां, कुछ संगठनों और राजनैतिक दलों के लोगों ने हवा जरूर दे दी। कोई सुनयोजित साजिश की बात अभी सामने नहीं आई है।
शनिवार की सुबह दर्शनपुरवा और उसके आसपास के इलाकों के लोगों जगे। इन लोगों ने अपने मोबाइल का व्हाटसअप और फेसबुक खोली तो उसमें दर्शनपुरवा में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक धर्म का बैनर फाड़े और उसे पैरों से कुचलने का मैसेज देखा।
इससे लोगों में उत्तेजना फैल गई और हजारों लोग मां दुर्गा जी का फोटो और धार्मिक झंडे लेकर पुरुष और महिलाएं सड़क पर आ गए। धार्मिक और उन्मादी नारेबाजी की। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की एक नहीं सुनी। लोग इतने उग्र थे कि पुलिस के सामने पुलिस और प्रशसानिक अफसरों को खरी-खोटी सुना रहे थे।
अपशब्द कह रहे थे। आईजी, एसएसपी और एसपी से धक्का मुक्की की। पुलिस वालों से हाथापाई की। इतने पर भीड़ का गुस्सा नहीं थमा। पुलिस के जरा एक्शन लेने पर पथराव कर दिया और देखते ही देखत हालात बेकाबू हो गए। इलाकाई लोगों का उग्र रूप देख एक बार पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी सकपका गए। बैक फुट पर आए और फिर लाठीचार्ज किया। आश्रू गैस के गोले और रबर बुलेट चलाई पर फायरिंग नहीं की।
अफसर जानते थे कि गोली चलाई तो हालात और बिगड़ जाएंगे। इसलिए पुलिस अफसरों ने संभल कर कार्रवाई की। नतीजा यह रहा है सुबह से शाम तक बवाल चलता रहा। दर्शनपुरवा के प्रशांत कुमार ने बताया कि समुदाय विशेष के लोगों ने दूसरे समुदाय के लोगों की भवना को ठेस पहुंचाया है।
उन पर कार्रवाई न किए जाने से गुस्सा है। अगर मामला धर्म से जुड़ा नहीं होता तो शायद जो पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की बात मान लेते। राम नगर चौराहा दर्शनपुरवा के रवींद्र कुमार का कहना है कि अगर ऐसा उग्र रूप क्षेत्र के लोग नहीं दिखाते तो पुलिस उनकी भवनाओं की फिक्र नहीं करती है और दूसरे समुदाय के लोगों पर नरम रवैया अख्तियार करे रहती है। जैसा की पहले कई मामलों में हो चुका है।