कमाई का दूसरा नाम अवैध निर्माण की सीलिंग है। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) को सीलिंग के बाद कंपाउंडिंग शुल्क के रूप में मोटी आय होती है। पूरी तरह से अवैध निर्माण पर सील हुई बिल्डिंग में निर्माण करवाकर पुलिस मलाई काटती है। बीच-बीच में निगरानी के लिए जिम्मेदार केडीए के कर्मचारियों को भी हिस्सा मिलता रहता है। केडीए बाबू निर्माण रुकवाने की फाइलें दबा देते हैं। पैसे के बल पर निर्माणकर्ता कई-कई महीनों तक चले निर्माण केबाद इमारत बनाकर खड़ी कर लेते हैं। एक बार इमारत बन गई तो फिर उसका बाल भी बांका नहीं होता। विशेष मामलों में ही ध्वस्तीकरण होता है।
लोग धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराते हैं
अवैध निर्माण की ‘सीलिंग’
उप्र नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 28 के अंतर्गत विकास प्राधिकरणों को अवैध निर्माण को रोकने के लिए निर्माण स्थल को सील करने का अधिकार प्राप्त है। केडीए से नक्शा पास कराने के बाद लोग धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराते हैं। इस दौरान यदि इमारत सील हो गई तो स्वीकृत सीमा तक हुए अवैध निर्माण को कंपाउंडिंग शुल्क के जरिए नियमित करा लिया जाता है। इसके चलते लोग केडीए की सील तोड़कर निर्माण जारी रखते हैं कि आखिर में कंपाउंडिंग तो हो ही जानी है।
सीलिंग के बाद भी होता निर्माण
अवैध निर्माण की ‘सीलिंग’
सपा नेता की तर्ज पर अवैध निर्माण करने वाले रसूख और पैसे के बल पर न तो सीलिंग की चिंता करते हैं और ना ही अफसरों की। पैसे मिल जाने के बाद न तो केडीए कर्मचारी-पुलिस निर्माण के पास फटकती है और न ही अन्य जिम्मेदार विभाग। कमाई से बात न बने तो रसूख का इस्तेमाल होता है।
सील हैं 576 से अधिक इमारतें
अवैध निर्माण की ‘सीलिंग’
केडीए के सर्वे में शहर में करीब 576 इमारतें सील मिली हैं। इनका सर्वे कंपाउंडिंग शुल्क लेकर सील खुलवाने के लिए किया गया है। इनमें से ऐसी इमारतों की सूची अलग से बनाई जा रही हैं, जो पूरी तरह से अवैध हैं। बिल्डिंग बायलॉज के अंतर्गत या सीमित मात्रा में हुए अवैध निर्माण को नियमित किया जाएगा। कंपाउंडिंग की मद में केडीए को शुल्क मिलेगा।
सीलिंग से पहले पुलिस को सूचना
अवैध निर्माण की ‘सीलिंग’
किसी भी निर्माण को सील करने से पहले केडीए अफसर संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस को सूचना देते हैं। सीलिंग के बाद इसकी एक कॉपी संबंधित थाने में भी भेजी जाती है। यहां पर इस कॉपी को संज्ञान में लेना या न लेना पुलिस पर निर्भर है। केडीए की ओर से सिर्फ सूचना भर दी जाती है। सील तोड़कर दोबारा निर्माण कराने पर केडीए एफआईआर दर्ज कराता है। यही वजह है कि सैकड़ों इमारतें सील करने के बावजूद एफआईआर सिर्फ 25 से 30 मामलों में ही दर्ज कराई गई है।