पशुपालन विभाग का बधियाकरण अभियान अब बेजुबानों की मौत का कारण बन गया है। इससे पशुप्रेमियों में गुस्सा फूट पड़ा है। यूपी के हमीरपुर में 8000 बछड़ों का बधियाकरण किया गया एक-एक करके बछड़ों की इन्फेक्शन से मौत होती जा रही है। मौत के कारणों का जवाब देने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
मवेशियों में अन्नाप्रथा पर लगाम लगाने के लिए पशुपालन विभाग ने अन्ना बछड़ों का बधियाकरण कराया। लेकिन यह योजना बछड़ों की मौत का कारण बन रही है। हमीरपुर के गोहांड विकासखंड क्षेत्र में 80 बछड़ाें का बधियाकरण हुआ। इनमें इंफैक्शन फैला तो करीब 24 बछड़ों की मौत हो गई। जबकि पशुपालन विभाग इसे सिरे से नकार रहा है।
प्राकृतिक आपदाओं के बीच तंग हाल किसानों ने मवेशियों को छुट्टा कर दिया। वहीं शासन ने इस पर लगाम लगाने के लिए जिले में अन्ना उन्मूलन योजना के तहत निम्न कोटि के अन्ना बछड़ाें को चिंह्तिकर उनका बधियाकरण कराने का लक्ष्य रखा। जिसमें जिले को दिए गए 17 हजार बछड़ाें के बधियाकरण के सापेक्ष पशु पालन विभाग ने फरवरी माह तक सात हजार 547 बछड़ों का बधियाकरण करने का दावा किया है। लेकिन बधियाकर छोड़े गए बछड़ों की बाद में पशुपालन विभाग ने कोई सुधि नहीं ली। जिससे अब इन बछड़ों के मरने का सिलसिला शुरू है।
इंफेक्शन से हुई मौत
गोहांड निवासी पूर्व सभासद संता नेता ने बताया कि गोहांड पशुचिकित्सालय की टीम ने 80 बछड़ाें का बधियाकरण किया है। जिनमें करीब 24 बछड़ों की इंफै क्शन से मौत हो गई। इनके शव को खेताें में पड़े हुए देखा जा सकता है।
देख-रेख नहीं हुई
कस्बे निवासी भानु प्रताप का कहना है कि विभाग ने बछड़ों का बधियाकरण तो किया, लेकिन इसके बाद उनकी देखरेख नहीं की गई। जिससे एक-एक कर बछड़ाें के मरने का सिलसिला जारी है। किसान पुष्पेंद्र सिंह लोधी का कहना है कि फसलों को बचाने के लिए अन्ना मवोशियों को बाड़ों में रखे हैं। बाड़ों में बंद बछड़ों का जनवरी माह मेें पशु डाक्टराें ने बधियाकरण किया था।
मशीन से नसों को दबाकर किया जाता बधियाकरण
जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी विजय सिंह के मुताबिक बधियाकरण किए गए बछड़ों के मौत की जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि बछड़ाें में इंफैक्शन फैलने जैसी कोई बात नहीं है। क्योंकि बधियाकरण कार्य तो मशीन से नसों को दबाकर किया जाता है। जब चीरा नहीं लगाया तो इंफेक्शन का कोई प्रश्न ही नहीं है। बछड़ों के मरने के मामले की जानकारी करा इसकी जांच कराई जाएगी और उनकी मौत का सही कारण पता कराया जाएगा। बधियाकरण किए गए बछड़ों को पहचान के लिए पीले रंग का छल्ला कान में पहनाया गया है।