कानपुर में पकड़ी गई नकली नोट बनाने की मशीन
क्राइम ब्रांच टीम ने कानपुर पुखरायां के मीरपुर गांव में नकली नोट छापने का कारखाना पकड़ा हैं। कारखाने में असली नोट को स्कैन करके नकली नोट बनाये जा रहे थे।
मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सात लाख 64 हजार रुपये के 2000 के नए वाले नकली नोट बरामद किए गए हैं। आरोपियों के मुताबिक 90 लाख रुपये से अधिक के 2000 के नकली नोट छापकर बाजार में चला चुके हैं। 13 से 16 दिसंबर के बीच 93 लाख रुपये के नकली नोट छापकर कानपुर पहुंचाए गए। 27 और 28 दिसंबर को 17 लाख रुपये के नोट छापे गए। कई नामों का भी खुलासा किया है जो इस धंधे से जुड़े हैं। सरगना कानपुर का ही है जो फरार चल रहा है।
क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक मानिकचंद्र, दिनेशचंद्र यादव और भोगनीपुर पुलिस ने मीरपुर गांव में समरेंद्र सचान उर्फ शुभम के घर पर छापा मारा। वहां से 2000 रुपये के सात लाख 64 हजार रुपये नकली नोट, 2000 का एक असली नोट व सात अधछपे नोट, दो प्रिंटर/ स्कैनर, लैपटॉप, अलग-अलग रंग की पांच बोतल इंक, पेपर कटर, स्केल, एडॉप्टर, माउस, पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए। मौके से समरेंद्र सचान उर्फ शुभम निवासी मीरपुर पुखरायां कोतवाली भोगनीपुर, आशीष कुमार गुप्ता पुत्र महेशचंद्र गुप्ता निवासी मीरपुर, पुखरायां और पुखरायां के विवेकानंद नगर निवासी प्रसून सचान पुत्र रमाकांत सचान को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कानपुर के गंगागंज-पनकी निवासी विजय इस धंधे का मास्टरमाइंड है, उसके निर्देशन में कारोबार चल रहा था। कुछ बैंक शाखाओं से भी संपर्क था। अकबरपुर के बाढ़ापुर गांव निवासी वीपी पाल नकली नोट खरीदारों तक पहुंचाता था। अहरौलीशेख गांव के इस्लामाबाद मोहल्ले का एहसान सिद्दीकी भी धंधे में सहयोग करता था। नोट स्कैन करके कंप्यूटर पर सही किए जाते थे फिर प्रिंटर से प्रिंट निकाल कर दोनों साइड को जोड़कर नोट तैयार किया जाता था।