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हवालात तोड़ डॉक्टर को पीटा, लाठीचार्ज

Mon, 19 Oct 2015 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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सिविल लाइंस में डॉक्टर की बीएमडब्ल्यू कार की टक्कर से ओमर वैश्य महासभा के राष्ट्रीय मंत्री गल्ला कारोबारी दिनेश गुप्ता की मौत से गुस्साए परिजनों और कारोबारियों ने शनिवार देर रात कोतवाली थाने में जमकर उत्पात मचाया।
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हवालात का ताला तोड़कर डॉक्टर को पीटा। पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई की और इंस्पेक्टर हरीराम वर्मा का मोबाइल फोन छीन लिया। संतरी की राइफल छीनने की कोशिश की। ये लोग रिपोर्ट दर्ज करने, आरोपी डॉक्टर का मेडिकल कराने में हीलाहवाली और हवालात में डॉक्टर को मोबाइल पर बात करते देख भड़क उठे थे।

फोर्स कम होने से हालात बेकाबू हो गए। सूचना पर कोतवाली सीओ ओपी सिंह भारी फोर्स लेकर थाने पहुंचे और हंगामा कर रहे लोगों को लाठीचार्ज कर खदेड़ा। पुलिस ने हंगामे में शामिल चार लोगों को शांतिभंग करने में गिरफ्तार किया है।
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जनरलगंज के राधा कृष्ण अपार्टमेंट निवासी गल्ला कारोबारी दिनेश गुप्ता शनिवार रात परमट मंदिर में दर्शन करके बाइक से घर लौट रहे थे। सिविल लाइंस में आईजी आवास के पास आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अभिषेक त्रिवेदी की कार से टक्कर लगने पर उनकी मौत हो गई थी। राहगीरों ने डॉक्टर को पीटकर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया था।

देर रात करीब दो बजे दिनेश के पक्ष से दो सौ से ज्यादा लोग कोतवाली थाने पहुंचे और डॉक्टर का मेडिकल कराने की मांग की। इसी बीच डॉक्टर अपने मित्र अधिवक्ता का फोन लेकर किसी से बात करने लगे तो लोग भड़क गए और ईंटों से हवालात का ताला तोड़कर डॉक्टर को पीटना शुरू कर दिया।

थाने का संतरी, मुंशी बचाने पहुंचे तो उनसे भी हाथापाई की। सूचना पर सीओ फीलखाना फोर्स लेकर पहुंचे और लाठीचार्ज कर स्थिति काबू में की। पुलिस ने हंगामा कर रहे कारोबारी दिनेश के भांजे दीपक गुप्ता, भतीजे पुनीत गुप्ता, पड़ोसी अवनीश भाटिया और प्रभात वाजपेयी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद डॉक्टर को दूसरे थाने में शिफ्ट कर दिया। भाजपा विधायक सलिल विश्नोई भी देर रात थाने पहुंचे। दिनेश के बेटे सितांशु की तहरीर पर डॉक्टर पर लापरवाही से कार चलाकर जान लेने की रिपोर्ट दर्ज हुई। रविवार को पोस्टमार्टम से पता चला कि दिनेश की मौत हेड इंजरी से हुई।
हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद डॉक्टर को जेल
सिविल लाइंस में शनिवार रात तेज रफ्तार कार चलाकर गल्ला कारोबारी दिनेश गुप्ता की जान लेने के आरोपी डॉ. अभिषेक त्रिवेदी को रविवार देर शाम हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद जेल भेज दिया गया। आर्थोपडिक सर्जन डॉ. त्रिवेदी को जेल जाने से बचाने के लिए बड़े नेताओं और नामी डॉक्टरों ने जोर लगाया।

आला पुलिस अफसरों से लेकर इंस्पेक्टर तक से जुगाड़ लगाया लेकिन दिनेश के परिजनों और रिश्तेदारों के दबाव के आगे सब धरा रह गया। आखिर में पुलिस ने साधारण एक्सीडेंट को गैर इरादन हत्या में तरमीम कर डॉक्टर को जेल भेज दिया।
दिनेश को टक्कर मारने के बाद डॉ. अभिषेक वहां से भाग निकले थे। दिनेश के पीछे परमट मंदिर से दर्शन करके उनका बेटा शितांशु भी बाइक से आ रहा था, उसने राहगीरों की मदद से पीछा करके महिला थाने के बाद डॉक्टर को पकड़ लिया था। कोतवाली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

सूत्रों की मानें तो जिस दौरान इंस्पेक्टर हरीराम वर्मा उर्सला में दिनेश के परिवार वालों से बातचीत कर रहे थे तभी उनके पास एक निजी अस्पताल के संचालक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री के भाई का फोन आया। उन्होंने डॉक्टर की मदद की गुजारिश की। शहर के नामचीन डॉक्टर और नर्सिंग होमों के मालिक भी अफसरों से डॉ. अभिषेक की मदद को कहते रहे। बड़े लोगों की पैरवी का असर यह रहा कि पुलिस ने हिट एंड रन के इस मामले को साधारण एक्सीडेंट में दर्ज किया। डॉक्टर का रात में मेडिकल नहीं कराया। पुलिस की उम्मीदों पर उस वक्त पानी फिर गया जब दिनेश के परिजनों, रिश्तेदारों और पहचान वालों ने कोतवाली थाने में धावा बोल दिया।

आक्रोशित लोगों ने हवालात का ताला तोड़ दिया और डॉक्टर को पीटा। तड़के डॉक्टर का मेडिकल कराया और दोपहर में एक्सीडेंट को गैर इरादन हत्या में बदल दिया। दोपहर में कड़ी सुरक्षा में डॉक्टर को कोर्ट में पेश किया। इसक बाद उन्हें जेल में दाखिल कर दिया। पुलिस अफसरों को लग रहा था कि दिनेश ओमर वैश्य महासभा के राष्ट्रीय मंत्री और कारोबारी थे। डॉक्टर को जेल नहीं भेजा गया गया तो सोमवार को व्यापारी संगठन, महासभा के लोग बखेड़ा खड़ा कर देंगे।
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