अनियमितताओं के चलते प्रतिबंध झेल रहे ब्रह्मावर्त बैंक के प्रबंधकों की ओर किए जाने वाले फर्जीवाड़े में कमी नहीं आई। कई स्तर पर शिकायतें पहुंचने के बाद एक- एक कर परतें उधड़ रही हैं। अब नया मामला फर्जी खाते में लेनदेन करने और पोल खुलने पर उसमें फेरबदल करने का कारनामा सामने आया है। अमर उजाला के पास इस फर्जीवाड़े के साक्ष्य उपलब्ध हैं।
दरअसल ब्रह्मावर्त बैंक की देवनगर शाखा में वर्ष 2001 से 2016 तक विभा इंडस्ट्रीज के नाम से एक खाता दस्तावेजों में दर्ज है। इस खातेदार का पता बैंक के रिकार्ड में नहीं है। पते के नाम पर सिर्फ विभा इंडस्ट्रीज कानपुर लिखा हुआ है। बैंक के सूत्र बताते हैं कि इस तरह के तमाम फर्जी खातों के जरिये लेनदेन करके ही बैंक का बेड़ा गर्क हुआ है।
विभा इंडस्ट्रीज के नाम करीब 12 लाख रुपये के क्लेम वसूले गए। इधर बैंक पर प्रतिबंध लगा तो जांच के डर से फर्जी खातों को दुुरुस्त करने का काम बैंक प्रबंधन ने शुरू कर दिया। ऐसे ही दुरुस्तीकरण का एक दस्तावेज अमर उजाला के हाथ लगा है। जिस खाता संख्या (000100063901) में 2001 से अप्रैल 2016 तक विभा इंडस्ट्रीज का नाम लिखा था, उसी खाता संख्या पर अब बीसीसीबी का नाम दर्ज है। यानी खाता संख्या वही है लेकिन फर्जीवाड़ा करके उसके खाताधारक का नाम बदल दिया गया।
दरअसल ये इस वजह से संभव हुआ क्योंकि उस खाता संख्या का मालिक हकीकत में मौजूद ही नहीं है। उक्त खाते का नाम विभा इंडस्ट्रीज से बदलकर बीसीसीबी इस वजह से किया गया ताकि इसे बैंक का खाता यानी ब्रह्मावर्त कामर्शल कोआपरेटिव बैंक बताया जा सके। रिजर्व बैंक के सूत्र बताते हैं कि इस तरह की गड़बड़ी आर्थिक अपराध माना जाता है। इसकी जांच इकॉनोमी ऑफेंस विंग को जा सकती है। इस संबंध में बैंक के सचिव आशुतोष मिश्रा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।