अरबन कोआपरेटिव बैंक में डेढ़ करोड़ रुपये गायब होने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। बैंक अध्यक्ष की तहरीर पर डायरेक्टर, सचिव और बैंक मैनेजर के खिलाफ बुधवार को यूपी के हरदोई में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अध्यक्ष की याचिका पर कोर्ट ने जनवरी में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन कोतवाली पुलिस मामले को दबाए रही। अध्यक्ष ने दोबारा कोर्ट में दस्तक दी थी।
जिला हरदोई के सिनेमा चौराहा स्थित अरबन कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रामेंद्र सिंह शहर की आवास विकास कालोनी में रहते हैं। उन्होंने बताया कि नवंबर 2016 में रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर बैंक की कई शाखाओं में जांच की थी। कई बचत खातों से ओवरड्रॉफ्ट लिया गया था। नियमानुसार बचत खातों से ओवरड्रॉफ्ट लिया ही नहीं जा सकता। यह सुविधा सिर्फ चालू खातों पर ही उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि खाता संख्या 178 और 179 से साढे़ तीन-साढ़े तीन लाख रुपये निकाले गए।
खाता संख्या 178 प्रभुदयाल और खाता 179 जगदीश के नाम दर्ज है। बैंक में लिखे पते पर खातेदारों का पता किया गया तो वह फर्जी निकले। इसके अलावा कई खातों से ओवरड्राफ्ट कर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। गड़बड़ी में बैंक के डायरेक्टर दिनेश पाल पुत्र छोटे सिंह, सचिव अनिल सिंह पुत्र दिनेश पाल और शाखा प्रबंधक संजय श्रीवास्तव की मिलीभगत सामने आई।
अध्यक्ष ने लखनऊ आरबीआई में शिकायत करने के साथ शहर कोतवाली पुलिस में तहरीर दी। आरबीआई के अफसरों की जांच में भी तीनों लोग दोषी पाए गए। रामेंद्र सिंह ने बताया कि मामले में कोतवाली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर वे कोर्ट गए। कोर्ट ने 31 जनवरी को कोतवाली पुलिस को तीनों पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। फिर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो वे दोबारा कोर्ट गए।
पुलिस ने दिनेश पाल, अनिल सिंह और संजय श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। कार्यवाहक कोतवाल राजन कुमार ने बताया कि वित्तीय गड़बड़ी पर तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।