ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआईसी) का जमीन घोटाला 600 करोड़ तक पहुंच रहा है। वहीं बीआईसी की जमीनों का वैल्यूएशन करने वाली मल्टीनेशनल कंपनी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्लूसी) भी सीबीआई जांच के घेरे में आ गई है। रविवार को भी सीबीआई टीम ने इस घोटाले में कई अधिकारियों से पूछताछ की।
बीआईसी की बेशकीमती जमीनों को रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर कौड़ियों के भाव बेचने के मामले की जांच सीबीआई कर रही है। गुरुवार देर शाम को सीबीआई की दो सदस्यीय टीम दिल्ली से कानपुर पहुंची थी। जांच अधिकारी मोहित कुमार की अगुवाई में टीम शहर स्थित बीआईसी मुख्यालय में दस्तावेजों की जांच में लगी है। शुरुआती जांच में 105 करोड़ के घोटाले की बात कही जा रही थी।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक इन जमीनों का वैल्यूएशन करने वाली मल्टीनेशनल कंपनी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स के अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। बीआईसी के सूत्र बताते हैं कि सीबीआई ने बीआईसी के अधीन रहीं कुल संपत्तियों का ब्यौरा जुटा लिया है। अब तक बेची जा चुकी जमीन की जानकारी और भौतिक सत्यापन के बाद घोटाला 600 करोड़ तक पहुंच रहा है। यह जमीनें शहर के उद्योगपतियों, बिल्डरों और भूमाफिया की जेबों में गई हैं।
यह है मामला
बीआईसी के अधिकारियों ने वर्ष 2005-06 में शहर के पॉश एरिया मेें स्थित बेशकीमती जमीनों का सौदा औने पौने दाम पर कर दिया था। खेल यह हुआ कि जो जमीन बेची गई उस पर उस वर्ष का सर्किल रेट लगाने के बजाय वर्ष 1981 का सर्किल रेट लगाया गया। यानी 24-25 साल पुराने सर्किल रेट पर जमीन बेचकर चहेतों को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया और मिलीभगत करने वाले अफसरों ने अपनी जेबें भरीं। वर्ष 2012 में सूती मिल मजदूर यूनियन ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इसकी शिकायत की थी। प्रदेश सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।