पुलिस रिकार्ड में मृत बदमाश की 30 साल बाद मौत
चित्रकूट। कथित तौर पर मरने के 30 साल बाद भी बदमाश रमेश यादव चैन की बंशी बजाता रहा और रविवार को जब बीमारी से मौत के बाद उसकी अर्थी उठी तो पुलिस वाले भी सन्न रह गए।
वजह सिर्फ यही थी कि पुलिस रिकार्ड में उसकी हत्या 1987 में हो जाना दर्ज थी। वास्तविकता सामने आने पर अब पुलिस वाले नजरे चुरा रहे हैं। पुलिस अधिकारी रिकार्ड देखकर ही कुछ बताने की बात कर रहे हैं।
थाना क्षेत्र के महावीर नगर में रविवार को रमेश यादव (55) पुत्र मथुरा प्रसाद की बीमारी के चलते मौत हो गई। यह नाम सुनते ही स्थानीय बड़े बुजुर्र्गों को शक हुआ। जानकारी करने पर पता चला कि लगभग 30 साल पहले रमेश यादव चलती ट्रेन और कुछ स्थानों पर लूट, छिनैती की घटनाओं में पुलिस रिकार्ड में वांछित था।
मझगंवा पुलिस ने इनाम भी घोषित किया था। 1987 में टिकरिया गांव के एक तालाब के पास सिर कटी लाश मिली थी। पुलिस ने छानबीन के बाद उसकी शिनाख्त रमेश यादव के रूप में की थी। इसकी जानकारी जब रमेश को हुी तो वह सतना मप्र में नाम बदलकर परिवार के साथ रहने लगा। मानिकपुर में उसके भाई और अन्य परिवार रहता है। बताया जाता है कि वह कभी-कभार मिलने भी आता था।
रविवार को उसकी मानिकपुर में ही मौत हो गई। भाई कौशल और जयकरण ने बताया कि रमेश की ही मौत बीमारी से हुई है। अभी तक वह सतना में रहता था। थानाध्यक्ष साजिद खान का कहना था रविवार को मृत रमेश पहले बदमाश था और उसकी मौत की पुष्टि पुलिस रिकार्ड में है। पुलिस रिकार्ड अभी मिल नहीं पाया है। छानबीन की जा रही है।