अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। घाटमपुर क्षेत्र के रार गांव में 11 वर्ष पूर्व हुई दहेज हत्या के मामले जिला जज ने पति को दस वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मृत्यु के पूर्व महिला ने अभियुक्त पति के पक्ष में बयान दिए थे लेकिन अदालत ने उन बयानों को विश्ववास योग्य न मानते हुए सजा सुनाई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि हत्या का मुकदमा फतेहपुर जिला के शुक्लनपुरवा जाफरगंज निवासी प्रवीण शंकर तिवारी ने दर्ज कराया था। थाने में दी तहरीर में उन्होंने बताया था कि बेटी रेखा की शादी घाटमपुर क्षेत्र के रार गांव निवासी चंद्रकांत के साथ 31 जनवरी 2008 को की थी। आरोप था कि दहेज में बाइक की मांग पूरी न होने पर पति रेखा को प्रताड़ित करता था। 24 अक्तूबर 2008 को रेखा को जला दिया गया। उपचार के दौरान 2 नवंबर को उसकी मौत हो गई थी।
उपचार के दौरान तत्कालीन तहसीलदार कानपुर सदर सियाराम मौर्य ने मृतका के बयान दर्ज किए थे। पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई जिला जज सुभाष चंद्र की अदालत में हुई। अभियुक्त ने वकील ने तहसीलदार के समक्ष दिए गए रेखा के बयान को आधार उसके निर्दोष होने का तर्क दिया। अदालत में तत्कालीन तहसीलदार भी पेश हुए।
शासकीय अधिवक्ता ने जिरह में मृत्यु पूर्व बयान की वैधानिकता और औचित्य पर सवाल खड़े किए गए। शासकीय अधिवक्ता के तर्कों के आधार पर अदालत ने रेखा के मृत्यु पूर्व बयान को विश्वास योग्य न मानते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया। उसे दस साल के कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
दहेज हत्या में पति को दस साल का कारावास
घाटमपुर के रार गांव में 2008 में हुई थी घटना
्रफतेहपुर के शुक्लनपुरवा मेें था महिला का मायका