कानपुर देहात। जिला अस्पताल परिसर में बन रहे मेडिकल कॉलेज में काम करते समय एक मजदूर की मौत हो गई थी। बुधवार सुबह शव निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में रखकर ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर एसडीएम, तहसीलदार सहित पुलिस पहुंची और मृतक के परिवार को 12 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की बात का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।
मूलरूप से परसेड़ा चांदपुर फतेहपुर निवासी मजदूर संतोष निषाद (49) के परिवार में पत्नी रानी, बेटी रोशनी, आरती, लक्ष्मी, काजल और आयुष हैं। इसमें रोशनी और आरती की शादी हो गई है। जबकि अन्य बच्चे पढ़ाई कर रहे। रानी ने बताया कि दो माह से मेडिकल कॉलेज में मजदूरी कर रहे थे। रविवार को संतोष घर आए थे। इसके बाद सोमवार को वह वापस काम पर चले गए। मंगलवार दोपहर 10 वीं मंजिल पर बैठकर सीमेंट और मौरंग का मसाला बने रहे थे। इस दौरान अचानक फर्श में गिरने मौत हो गई थी। सूचना पर मंगलवार रात में ही परिजन पहुंच गए थे। बुधवार सुबह होते ही परिवार के लोग मोर्चरी से शव निकालकर निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में ले जाकर रख कर ठेकेदार पर हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर एसडीएम अकबरपुर सुरभि, तहसीलदार रणविजय और थाना पुलिस पहुंच गई थी। सभी अधिकारियों ने परिवार के लोगों को समझाया, लेकिन मुआवजे की मांग को लेकर परिवार के लोग अड़े रहे। काफी देर तक चले हंगामें के बाद ठेकेदार ने मृतक की पत्नी के खाते में दो माह में 12 लाख रुपये भेजने आश्वासन दिया। इसके साथ ही एक लाख रुपये नकद अंतिम संस्कार के लिए दिए। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। तहसीलदार रणविजय शर्मा ने बताया कि ठेकेदार ने हर मजदूर का बीमा कराया है। परिवार के लोगों को बीमा कंपनी द्वारा 12 लाख रुपये दो माह में दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने शव भेजने के लिए गाड़ी की व्यवस्था की है। अंतिम संस्कार के लिए एक लाख रुपये मृतक के परिवार को दिए गए हैं।