कानपुर। हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक के अलावा नसों में खून का थक्का जमने से रोगियों की हाथ-पैर की उंगलियां नीली पड़ रही हैं। इसके साथ रिनॉल्ट डिजीज के रोगियों की भी दिक्कत बढ़ गई। इसके साथ ही गैंगरीन के लक्षण वाले रोगी अस्पताल में आ रहे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि रिनॉल्ट डिजीज ऑटो इम्यून बीमारी है। ठंड में नसों के सिकुड़ने से उंगलियां नीली पड़ जाती है। इससे हाथों को गर्म रखना चाहिए। हाथों में दस्ताने पहने रहें। इसके अलावा ठंड में हाथ-पैर की नसें सिकुड़ने से खून का थक्का जम रहा है। रोगी कार्डियोलॉजी और हैलट में जांच करा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. जीडी यादव ने बताया कि डायबिटीज के रोगियों और नसों के रोगियों में खून की सप्लाई प्रभावित होने से गैंगरीन के लक्षण उभर आते है। जाड़े में इन रोगियों की संख्या बढ़ जाती है।