आरोपी फरीद को दुष्कर्म का दोषी पाते हुए 22 साल जेल की सजा सुनाई। 20 हजार रुपये जुर्माना किया। पाक्सो एक्ट में भी दोषी को 22 साल की जेल और 20 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। सभी सजाएं साथ चलेंगी। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। फैसले के दौरान आरोपी फरीद अदालत में मौजूद था।
समाज में ऐसे कृत्यों के लिए माफी नहीं दी जा सकती
बांदा विशेष लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम ने इस मामले की पैरवी की। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में पहले कभी 24 दिनों में निर्णय नहीं हो पाया है। बचाव पक्ष की दलीलों के दौरान अदालत ने कहा कि किसी मासूम से दुष्कर्म करना बहुत ही घिनौना कृत्य है। समाज में ऐसे कृत्यों के लिए माफी नहीं दी जा सकती है।
निर्णय आने पर परिजनों ने किया शोर-शराबा
गुरुवार को निर्णय सुनाए जाने के दौरान दोषी फरीद के परिजन भी अदालत में उपस्थित थे। विशेष न्यायाधीश के निर्णय सुनाते ही परिजनों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। दोषी फरीद ने भी आदेश पत्र में हस्ताक्षर बनाने से मना कर दिया। न्यायाधीश से फरियाद सुनने की अपील की। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप पर दोषी ने हस्ताक्षर बनाए। परिजन भी शांत हो गए।