बैंक के सीधे स्ट्रांग रूम में पहुंचने के कारण शातिरों को स्ट्रांग रूम का मुख्य दरवाजा नहीं छूना पड़ा। इस कारण बैंक का अलार्म बजा ही नहीं। बैंक मैनेजर ने बताया कि चोरी गए गहने 29 ग्राहकों के हैं। उन ग्राहकों ने बैंक में सोना गिरवी रखकर लोन लिया था। दस्तावेजों का भी मिलान किया जा रहा है।
पूरी प्लानिंग से दिया वारदात को अंजाम
पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने बैंक जाकर जांच पड़ताल की। डीसीपी पश्चिम विजय ढुल ने बताया कि जिस तरह से बैंक के स्ट्रांग रूम में चोरी हुई है इससे साफ है कि शातिर पेशेवर अपराधी हैं, जिन्होंने पूरी प्लानिंग के बाद वारदात को अंजाम दिया है।
कोई ऐसा व्यक्ति गैंग में शामिल है, जिसे बैंक के अंदर की पूरी जानकारी है। कई दिनों तक रेकी की गई होगी। बेवजह बैंक के अंदर कई बार आने वालों की तलाश में पुलिस सीसीटीवी फुटेज देख रही है। घटनास्थल से कई साक्ष्य जुटाए गए हैं और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
दाखिल होते ही कैमरों का मुंह घुमाया
ब्रांच के मैनेजर नीरज राय ने बताया कि वर्ष 1969 में भौंती में शाखा खोली गई थी। बैंक में 11 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसमें से चार कैमरे स्ट्रांग रूम में लगे हैं। स्ट्रांग रूम में दाखिल होते ही शातिरों ने पहले सीसीटीवी कैमरों के मुंह मोड़ दिए, इस कारण शातिर कैमरे में कैद नहीं हुए। पुलिस को शक है कि शातिरों की संख्या 10 होगी।
खुलासे के लिए टीमें लगाई गई हैैं। पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज देख जा रहे हैं। जल्द ही खुलासा किया जाएगा। -बीपी जोगदंड, पुलिस कमिश्नर