उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में हर्ष की लहर है। कोंच तहसील के एक छोटे से गांव खाबरी के निवासी बृजलाल खाबरी बचपन से दलितों को उनके अधिकार दिलाने और अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए मशहूर रहे हैं। उन्होंने डीवी डिग्री कॉलेज में छात्र संघ अध्यक्ष का दो बार चुनाव भी लड़ा। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली। उन्होंने बसपा संस्थापक कांशीराम के भाषण से प्रभावित होकर घर-बार छोड़ दिया था।
1999 के लोकसभा चुनाव में बृजलाल खाबरी जालौन से सांसद चुने गए। अगला चुनाव वे हार गए लेकिन कांशीराम और बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव और झारखंड-छत्तीसगढ़ का प्रभारी भी बनाया गया। बाद में बसपा सुप्रीमो ने उन्हें पद से हटा दिया था। इसके बाद खाबरी ने कांग्रेस की ओर रुख कर लिया। वह कांग्रेस अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री बने। अब कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बनाए गए हैं।
कांग्रेस ने दलित वोटों पर साधा निशाना
तकरीबन पंद्रह सालों तक बृजलाल खाबरी बुंदेलखंड में बहुजन समाज पार्टी का बड़ा चेहरा रहे। साल 1999 में वे बसपा के टिकट पर जालौन-गरौठा लोकसभा सीट पर चुनाव जीते थे। साल 2004 में भी बसपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था, परंतु वे चुनाव हार गए थे। साल 2008 में बसपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर कद बढ़ाने का काम किया था।
इसके बाद बसपा ने 2014 के चुनाव में एक बार फिर उन्हें जालौन-गरौठा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, परंतु उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वे बसपा में हाशिये पर चले गए थे। ले किन, साल 2016 में खाबरी ने कांग्रेस में शामिल होकर नई सियासी पारी की शुरुआत की थी। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने एक के बाद एक तीन चुनाव लड़े।
साल 2017 में कांग्रेस के टिकट पर ललितपुर की महरौनी विधानसभा से चुनाव लड़ा, 2019 में जालौन-गरौठा लोकसभा सीट से मैदान में उतरे, जबकि इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर महरौनी सीट से किस्मत आजमाई, लेकिन वे कोई करिश्मा नहीं दिखा सके। इन सभी चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, कांग्रेस हमेशा उन्हें पार्टी के दलित चेहरे के रूप में पेश करती रही।
अब खाबरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने बड़ा संदेश देने का काम किया है। खासतौर पर कांग्रेस के इस कदम को इसी साल मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। बुंदेलखंड से सटे मध्य प्रदेश कई इलाके आते हैं, यहां खाबरी की के जरिये कांग्रेस दलित वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश करेगी। हालांकि, इसमें पार्टी कितना सफल होगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।