यम और यमुना दोनों भाई-बहन में बहुत प्रेम है। कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन यमुना ने भाई यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर घर बुलाया। ऐसे में यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाता। बहन जिस सद्भावना से बुला रही है, उसे निभाना धर्म है।
यमराज को घर आया देखकर यमुना बहुत खुश हुई। आतिथ्य से प्रसन्न यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा। जिस पर यमुना ने कहा कि भाई आप हर वर्ष मेरे घर आएं और मेरी तरह जो बहन अपने भाई को टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कह दिया। तब से यह पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस मान्यता के चलते भाई दूज वाले दिन भाई बहनों के घर जाते हैं। जहां पर बहनें उनका टीका करने के साथ लंबी उम्र की कामना करती हैं। भोजन कराती हैं।