बांदा जिले में पांच साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या के दोषी रिश्ते के बाबा को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला सात तारीखों में सुनवाई के बाद महज 28 दिन में आया है। सजा सुनाए जाने के साथ विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अनु सक्सेना ने टिप्पणी की कि ऐसे अपराधों में दुर्दांत अपराधी को इससे कम सजा देना पीड़िता के साथ अन्याय होगा।
दोषी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) कमल सिंह गौतम ने बताया कि मरका थानाक्षेत्र के एक गांव की बच्ची के बाबा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 18 अप्रैल 2021 को रामबहादुर उनकी पौत्री को बिस्कुट खिलाने के बहाने घर ले गया और दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या कर दी।
आंगन में खपरैल और कबाड़ के बीच शव छिपा दिया। पुलिस ने नामजद रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी रामबहादुर प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया था। सिर्फ 42 दिन में जांच पूरी कर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। छह गवाह पेश किए गए। बुधवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अनु सक्सेना ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रामबहादुर को दोषी पाया और उसे फांसी की सजा सुना दी।
साथ ही एक लाख रुपये जुर्माना किया। धारा 377 (दुष्कर्म) में आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 201 (शव छिपाने) में 10 वर्ष की जेल व 20 हजार रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त जेल भुगतनी होगी। सभी सजाएं साथ चलेंगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी।