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बांदा : उतराते शव मिलने पर क्रेडिट लेने की होड़

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बांदा : मरका में यमुना नदी किनारे बैठे शोकग्रस्त परिजन। - फोटो : BANDA
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बांदा। यमुना नदी में डूबे लोगों की तलाश का श्रेय लेने के लिए शनिवार को अफसरों की निष्ठुुरता देखने को मिली। फतेहपुर के किशनपुर और मढ़ौली घाट पर लापता लोगों के शव उतराते हुए मिले थे, लेकिन बांदा और फतेहपुर के अफसरों में इस बात की होड़ मची थी कि ये शव उनकी तलाश के बाद मिले हैं। इस बात पर बांदा और फतेहपुर का जिला प्रशासन कुछ देर के लिए आमने-सामने आ गया। मामला बढ़ा तो उच्चाधिकारियों को दखल देना पड़ा।
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बांदा के मरका कस्बे में यमुना नदी में 11 अगस्त को बी धारा में नाव पलटने से 50 लोग लापता हो गए थे। इनमें से 15 लोग तैरकर बाहर आए। तीन के शव मिले। मगर 13 अगस्त को सुबह सात बजे से पहले 32 लोगों का कुछ पता नहीं चला था। नाव में ज्यादातर महिलाएं थीं, जो रक्षाबंधन पर भाइयों को राखी बांधने जा रही थीं।
हादसा होने के बाद राहत और बचाव कार्य बांदा प्रशासन की ओर से शुरू कराया गया। मगर लापरवाही इधर भी रही। डूबे लोगों के परिजनों ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के खाली हाथ लौटने पर शुक्रवार को आक्रोश जताया था। उधर, फतेहपुर जिला प्रशासन शुक्रवार दोपहर तक अपनी सीमा पर बड़े जाल का इंतजाम नहीं करवा पाया। ताकि बहकर आए लोगों के शवों को यहां रोका जा सके।
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इधर, शनिवार की सुबह किशनपुर और मढ़ौली घाट पर लापता लोगों के शव उतराते हुए मिलने के बाद फतेहपुर और बांदा प्रशासन ने यह बताने का प्रयास किया कि शव उनकी तलाश के बाद मिले हैं। फतेहपुर प्रशासन आठ शव मिलने के बाद अपनी पीठ थपथपाने लगा है।
वहीं बांदा प्रशासन ने सुबह 10:15 बजे अपनी उपलब्धियां बताने के लिए आनन फानन प्रेसवार्ता बुला ली। आठ शव मिलने की जानकारी दी। बताया कि बीते तीन दिनों से वह लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।। उन्हीं के प्रयास से ये शव मिले हैं। यह बात इतनी बढ़ गई कि उच्चाधिकारियों को दखल देना पड़ा।
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